राज्य की सत्ता में परिवर्तन आने के बाद बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। ‘चिकन्स नेक’ के नाम से लोकप्रिय सिलीगुड़ी कॉरिडोर को और अधिक सुरक्षित बनाने तथा बुनियादी ढांचे के विकास के उद्देश्य से ही यह कदम उठाया गया है।
अब उत्तर बंगाल में चीन, नेपाल और बांग्लादेश सीमा से भारत को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों की देखरेख की जिम्मेदारी राज्य सरकार के हाथों से लेकर केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी गयी है।
अब इन राजमार्गों के देखरेख की जिम्मेदारी केंद्रीय नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NHIDCL) और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सौंपी गयी है।
इस बाबत गत शुक्रवार को विज्ञप्ति जारी कर दी गयी है। जानकारों का मानना है कि इस परिवर्तन की वजह से इन बदहाल सड़कों की स्थिति बेहतर होगी। इस बारे में NHIDCL के एक अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर ये 6 सड़कें बेहद महत्वपूर्ण हैं।
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इसलिए इन सड़कों के बुनियादी ढांचों को बेहतर बनाने की जरूरत है। इतने दिनों तक राज्य सरकार (तृणमूल) इन सड़कों के देखभाल की जिम्मेदारी हमें नहीं सौंप रही थी इसलिए इनका विकास और मरम्मत नहीं हो पा रहा था। अब इस काम को जल्द से जल्द शुरू कर दिया जाएगा।
'चिकन्स नेक' की जिन 6 राजमार्गों के देखरेख की जिम्मेदारी केंद्रीय संस्थाओं को सौंपी गयी है उनमें शामिल हैं -
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 31
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 33
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 10
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 317
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 171
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 110
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बताया जाता है कि सेवक से कालिम्पोंग तक इन सभी सड़कों की मरम्मत की जाएगी। विशेषज्ञों ने पहले ही कहा था कि बदहाल जलनिकासी व्यवस्था के कारण ही इन सड़कों पर बार-बार भूधंसान की समस्या हो रही है। इसलिए केंद्रीय संस्था इन सड़कों को विस्तार के साथ-साथ जलनिकासी की बेहतर व्यवस्था भी करने वाली है। इसके साथ ही बताया जाता है कि सेवक में करोनेशन ब्रिज के विकल्प के तौर पर नई ब्रिज का निर्माण भी किया जाएगा।
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 171 के दोनों किनारों पर गोरुमारा के जंगल मौजूद हैं जहां एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की योजना बनायी जा रही है। विज्ञप्ति के मुताबिक राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 31, 33 और 317 की मरम्मत NHAI और बाकी राष्ट्रीय राजमार्गों की देखरेख NHIDCL करेगी।