काबुल : अफगानिस्तान में एक संगठन के आंकड़ों के अनुसार 18 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले लगभग एक-तिहाई अफगान लड़कियों की शादी हो जाती है। आशंका जताई जा रही है कि नए कानून के लागू होने के बाद यह अनुपात और अधिक बढ़ सकता है। इस बीच राजनीतिक विश्लेषक फहीमा महोमेद ने न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “बाल विवाह अपने आप में एक निरर्थक बात है, क्योंकि बच्चों में विचार करके सहमति देने की क्षमता नहीं होती। इसके ऊपर मौन को सहमति मान लेना अत्यंत खतरनाक है, इससे लड़की की राय को पूरी तरह नकार दिया जाता है। उनका यह भी कहना है कि कुरान भी महिलाओं को इस तरह किसी कार्य के लिए मजबूर करने या उनके साथ दुर्व्यवहार का समर्थन नहीं करता। बियाह के प्रस्ताव पर चुप्पी ही सहमति’ — ऋतुमती कुंवारी लड़की के लिए तालिबान का फतवा
विवादित ‘फैमिली लॉ’ को तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने मंजूरी दे दी है। छठी कक्षा के बाद लड़कियों की पढ़ाई पर लंबे समय से प्रतिबंध लगाकर आलोचना झेल रही तालिबान सरकार अब एक और विवादित ‘फैमिली लॉ’ को लागू कर रही है। इसमें कहा गया है कि ऋतुमती कुंवारी नाबालिग लड़की के लिए शादी के प्रस्ताव पर उसकी चुप्पी को ही ‘सहमति’ माना जाएगा। हालांकि यह नियम किसी लड़के या पहले से विवाहित महिला पर लागू नहीं होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था नाबालिग विवाह को बढ़ावा दे सकती है और लड़कियों की इच्छा तथा अधिकारों को दबाने का रास्ता खोल सकती है।
तालिबान के नए प्रावधानों के अनुसार ‘इस्लामिक कानून’ के तहत, ऋतुमती होने के बाद कोई लड़की चाहे तो बाल विवाह से अलग होने का निर्णय ले सकती है, लेकिन इसके लिए तालिबान कोर्ट की मंजूरी जरूरी होगी। सामान्यतः लड़की के पिता या दादा को बाल विवाह का पूरा अधिकार दिया गया है, लेकिन यदि वे लड़की के साथ अत्याचार करते हैं तो यह अधिकार वापस लिया जा सकता है।