नई दिल्ली: राष्ट्रीय चयनकर्ता जब अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज के लिए टेस्ट और वनडे अंतरराष्ट्रीय टीम चुनने के लिए मंगलवार को गुवाहाटी में बैठक करेंगे तो भारतीय टीम में हैरान करने वाले नाम नहीं होंगे लेकिन लाल गेंद के फॉर्मेट में उप कप्तान के तौर पर ऋषभ पंत के भविष्य पर गंभीर चर्चा हो सकती है। ऐसा समझा जाता है कि यह भावना बढ़ रही है कि 28 साल के इस तेजतर्रार विकेटकीपर बल्लेबाज को नेतृत्वकर्ता की भूमिका रास नहीं आ रही है। आईपीएल में लखनऊ सुपर जाइंट्स के साथ दो सत्र से ऐसे ही संकेत मिलते हैं।
पंत से छिनेगी जिम्मेदारी
यह भी नहीं भूलना चाहिए कि पिछले नवंबर में गुवाहाटी में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट मैच के दौरान शुभमन गिल की गैरमौजूदगी में जब पंत को कप्तानी सौंपी गई थी तो वह रणनीतिक तौर पर बहुत चतुर नहीं थे। भारतीय क्रिकेट बोर्ड ( बीसीसीआई ) के एक सूत्र ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर पीटीआई को बताया, ‘भारतीय क्रिकेट ऋषभ जैसे बल्ले से मैच विजेता को खोने का जोखिम नहीं उठा सकता। उन्होंने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से टेस्ट मैच जिताए हैं। जो लोग मायने रखते हैं उनमें यह भावना बढ़ रही है कि जब भी उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई तो उन्होंने बल्लेबाजी करते समय अच्छे फैसले नहीं लिए।’ उन्होंने कहा, ‘उसे खुलकर खेलने का मौका देना चयन समिति के दिमाग में सबसे ऊपर हो सकता है।’
टीम में कई विकेटकीपर मौजूद
ऋषभ पंत का मौजूदा फॉर्म चयन समिति की रातों की नींद उड़ा सकता है क्योंकि वनडे फॉर्मेट में केएल राहुल के बाद दूसरे विकेटकीपर के रूप में उनकी जगह पर सवालिया निशान बना हुआ है। ध्रुव जुरेल, संजू सैमसन और ईशान किशन की मौजूदगी में पंत को 50 ओवर के प्रारूप के लिए दबाव महसूस हो सकता है। अगर बीसीसीआई की मेडिकल टीम को जसप्रीत बुमराह के काम के बोझ से कोई दिक्कत नहीं है तो यह सीनियर तेज गेंदबाज एकमात्र टेस्ट खेलेगा लेकिन मौजूदा आईपीएल के दौरान उनके काम के बोझ को देखते हुए तीन मैच की वनडे सीरीज में उनके खेलने की कोई संभावना नहीं है।
सूर्या पर भी फैसला
माना जा रहा है कि मुख्य कोच गौतम गंभीर के इनपुट सूर्यकुमार का राष्ट्रीय कप्तान के तौर पर भविष्य तय करने में बहुत काम आएंगे। अगर उन्हें कप्तानी से हटा दिया जाता है तो उनके लिए बल्लेबाज के तौर पर टीम में अपनी जगह बनाए रखना मुश्किल होगा। सबसे सुरक्षित विकल्प यह है कि उन्हें आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ अगुआई करने का मौका दिया जाए और उस सीरीज में बल्ले से उनके प्रदर्शन को देखते हुए उनके भविष्य पर फैसला किया जाए। लेकिन अब इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि सेलेक्टर्स उस रास्ते पर चलेंगे।