नई दिल्ली: जापान की दिग्गज ऑटो कंपनी होंडा को 1955 के बाद पहली बार घाटा हुआ है। कंपनी ने ईवी पर बड़ा दांव खेला था लेकिन अमेरिका की सरकार ने इस पर मिलने वाली सब्सिडी अचानक बंद कर दी। इससे ईवी गाड़ियों की बिक्री में काफी गिरावट आई। हाल में तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद अमेरिका में ईवी गाड़ियों की बिक्री नहीं बढ़ी है। मार्च में खत्म हुए फाइनेशियल ईयर में होंडा को करीब 2.6 अरब डॉलर का घाटा हुआ है।
ट्रंप सरकार ने उत्सर्जन के नियमों में बदलाव किया और अमेरिकी खरीदारों के लिए 7,500 डॉलर का टैक्स क्रेडिट खत्म कर दिया। इसके बाद होंडा और दूसरी ग्लोबल कंपनियों का ईवी को लेकर उत्साह ठंडा पड़ गया। सितंबर में टैक्स क्रेडिट खत्म होने के बाद ईवी की बिक्री में काफी गिरावट आई। कार कंपनियां अमेरिका में उत्सर्जन के सख्त नियमों की उम्मीद कर रही थीं। इस कारण इन कंपनियों ने ईवी गाड़ियां बनाने के लिए अरबों डॉलर का निवेश किया था।
दूसरी कंपनियों को भी चपत
लेकिन ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने पिछली सरकार के सख्त उत्सर्जन नियमों को खत्म कर दिया। इसके साथ ही कंपनियों के लिए भी उत्सर्जन के कड़े नियमों को खत्म कर दिया गया। इससे कार कंपनियों को भारी चपत लगी। जनरल मोटर्स को 7.2 अरब डॉलर, फोर्ड को 17.4 अरब डॉलर और स्टेलांटिस को 25.4 अरब डॉलर की चपत लगी। हालांकि जनरल मोटर्स प्रॉफिट में रही लेकिन फोर्ड और स्टेलांटिस घाटे में रही।
नियमों में ढील
हालांकि ऑटो कंपनियों ने अपनी ईवी प्लान को पूरी तरह नहीं छोड़ा है। यूरोप और एशिया में उत्सर्जन के कड़े नियम बनाए जा रहे हैं। साथ ही अमेरिका के कई राज्यों में भी उत्सर्जन के नियमों को सख्त बनाया जा रहा है। कैलिफोर्निया ने 2025 तक पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों की बिक्री बंद करने की योजना है। साथ ही चीन की कंपनियों से भी ग्लोबल कंपनियों को कड़ी चुनौती मिल रही है। चीन की कंपनियां ज्यादातर ईवी कारें ही बेच रही हैं। हालांकि अमेरिका के बाजार में अभी उनकी ज्यादा मौजूदगी नहीं है।