नई दिल्ली: नीट-यूजी पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने महाराष्ट्र के लातूर स्थित रेनुकाई करियर सेंटर के संस्थापक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया है। एजेंसी का दावा है कि वह प्रश्नपत्र लीक करने वाले संगठित नेटवर्क का हिस्सा था।
सीबीआई के अनुसार, रविवार को कोचिंग सेंटर और संबंधित ठिकानों पर छापेमारी के दौरान आरोपी के निजी मोबाइल फोन से 3 मई को हुई परीक्षा का लीक प्रश्नपत्र मिला। इसी आधार पर उसे शाम को गिरफ्तार कर लिया गया।
जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र और उत्तर 23 अप्रैल को ही आरोपी तक पहुंच चुके थे, यानी परीक्षा से लगभग दस दिन पहले। एजेंसी अब मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच कर रही है ताकि डिलीट किए गए डेटा की भी जांच की जा सके।
सीबीआई का आरोप है कि लीक सामग्री की हस्तलिखित प्रतियां बनाकर कई लोगों तक पहुंचाई गईं, जिन्हें परीक्षा के बाद नष्ट कर दिया गया। इससे पहले एजेंसी रसायन विज्ञान के व्याख्याता पी. वी. कुलकर्णी और जीव विज्ञान की व्याख्याता मनीषा मंधारे को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनका संपर्क मनीषा वाघमारे नामक महिला के जरिए हुआ था, जो फिलहाल हिरासत में है।
जांच के मुताबिक, छात्रों के लिए विशेष कोचिंग सत्र आयोजित किए गए, जिनमें उनसे भारी रकम वसूली गई और उन्हीं प्रश्नों का अभ्यास कराया गया जो बाद में परीक्षा में पूछे गए। पेपर लीक सामने आने के बाद सीबीआई ने मामला दर्ज कर कई टीमें गठित की हैं। विवाद बढ़ने पर परीक्षा रद्द करनी पड़ी।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के अनुसार, परीक्षा देश के 551 शहरों और 14 विदेशी केंद्रों पर हुई थी, जिसमें करीब 23 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। एनटीए ने बताया कि 7 मई को अनियमितताओं की जानकारी मिली, जिसे अगले दिन केंद्रीय एजेंसियों को आगे की जांच के लिए भेज दिया गया।