राज्य में लंबे समय से चल रहे संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक समिति गठित करने की घोषणा की है। इसके साथ ही महिलाओं पर अत्याचार की कई घटनाओं की जांच के लिए एक अलग आयोग भी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि दोनों समितियां 1 जून से अपना काम शुरू करेंगी।
संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच के लिए गठित कमेटी में कौन-कौन सदस्य होंगे?
इस बारे में भी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच के लिए कमेटी का गठन सेवानिवृत्त न्यायाधीश विश्वजीत बसु की अध्यक्षता में की जाएगी। इस कमेटी में आईपीएस अधिकारी के. जयरामन सदस्य सचिव बनाए जा गए हैं।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि विभिन्न सरकारी परियोजनाओं में हुए भ्रष्टाचार की जांच की जिम्मेदारी इस कमेटी पर होगी। मिड-डे मील योजना से लेकर आवास योजना, मनरेगा (100 दिनों का काम) सहित जिन-जिन परियोजनाओं में भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, उन सभी मामलों की जांच की जाएगी।
इसके अलावा सरकारी परियोजनाओं के तहत जिन कार्यों में भ्रष्टाचार हुआ है उनकी भी जांच यह कमेटी करेगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं पर अत्याचार होने के आरोपों के साथ-साथ अन्य स्थानों पर महिलाओं के खिलाफ हुई घटनाओं की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। इस समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश समाप्ति चट्टोपाध्याय करेंगी। इस समिति की सदस्य सचिव आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन को बनाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों कमेटियों के सदस्य सचिव सरकार की ओर से पूरा सहयोग करेंगे। यह भी व्यवस्था की जाएगी कि आम जनता दोनों समितियों के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। दोनों कमेटियों के सदस्य सचिव विभिन्न थानों और जिलों में जाकर मौके पर निरीक्षण करेंगे।
जरूरत पड़ने पर जनसुनवाई भी आयोजित की जाएगी। जनता को यह भी बताया जाएगा कि शिकायतें कहां और कैसे दर्ज की जाएंगी। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामलों को छोड़कर बाकी मामलों की जांच ये दोनों कमेटियां देखेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कमेटियों द्वारा मांगी जाने वाली सभी जानकारी और दस्तावेज सरकार उपलब्ध कराएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि 30 दिनों के भीतर दोनों कमेटियां अपनी रिपोर्ट देंगी। उस रिपोर्ट के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी।