नई दिल्ली : केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को नई दिल्ली में संयुक्त राज्य अमेरिका के परमाणु उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाले एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को तेज करने तथा विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में किए गए सुधारों पर प्रकाश डाला।
इस प्रतिनिधिमंडल में न्यूक्लियर एनर्जी इंस्टीट्यूट (एनईआई), प्रमुख अमेरिकी कंपनियों तथा यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) के प्रतिनिधि शामिल थे। बैठक के दौरान केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (शांति) अधिनियम’ जैसे ऐतिहासिक कानून पर प्रकाश डाला और इस ढांचे के तहत किए गए सुधारों की जानकारी दी।
वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज नई दिल्ली में संयुक्त राज्य अमेरिका के परमाणु उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाले एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, जिसमें न्यूक्लियर एनर्जी इंस्टीट्यूट (एनईआई), प्रमुख अमेरिकी कंपनियों और यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) के प्रतिनिधि शामिल थे।”
वित्त मंत्रालय के अनुसार, शांति अधिनियम के तहत किए गए सुधार भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को तेज करने, तकनीकी साझेदारियों को गहरा करने और देश के परमाणु ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र में निवेश प्रवाह को बढ़ाने में सहायक होंगे।
वित्त मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को यह भी बताया कि हालिया नीतिगत पहलों के तहत भारत ने परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में 49 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दी है, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र में वैश्विक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।यह कदम उन अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए नए अवसर खोलेगा जो भारत के बढ़ते परमाणु ऊर्जा बाजार में भागीदारी करना चाहती हैं।
बैठक के दौरान निर्मला सीतारमण ने जोर देकर कहा कि तकनीकी सहयोग और रणनीतिक साझेदारी भारत के परमाणु ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र में नवाचार और मजबूती को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग और सहभागिता के अवसर तलाशने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
वित्त मंत्रालय ने कहा, “वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी सहयोग और रणनीतिक साझेदारियां भारत के परमाणु ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र में नवाचार और लचीलापन को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण प्रेरक बन सकती हैं।”
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए स्वच्छ और सतत ऊर्जा स्रोतों के विस्तार पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रहा है।
सरकार हाल के वर्षों में ऊर्जा और बुनियादी ढांचे सहित कई रणनीतिक क्षेत्रों में निजी और विदेशी भागीदारी बढ़ाने के लिए कई नीतिगत कदम उठा रही है। भारत की स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में पहल ने दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा योजनाओं के तहत नवीकरणीय और परमाणु ऊर्जा विकास पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया है।