OBC आरक्षण को लेकर बंगाल मंत्रिमंडल ने एक अभूतपूर्व फैसला लिया है। बंगाल की भाजपा सरकार ने पूर्व की सरकार की सभी नीतियों को रद्द कर दिया गया है। इसके साथ ही ओबीसी आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है।
मंगलवार को राज्य के पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा जारी विज्ञप्ति में इस बाबत स्पष्ट जानकारी दी गयी है। अब से 66 जातियों या वर्गों को उच्च शिक्षा में प्रवेश और राज्य सरकार के अधीन नौकरियों में 7 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा।
अब तक OBC ‘ए’ श्रेणी में 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता था जबकि OBC ‘बी’ श्रेणी में 7 प्रतिशत आरक्षण मिलता था। इस विभाजन को पहले ही कलकत्ता हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था।
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अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि अब सभी को मिलाकर केवल एक ही आरक्षण दिया जाए। साथ ही 2010 के बाद जारी किए गए सभी OBC प्रमाणपत्र भी रद्द कर दिए गए थे। इस मामले को लेकर बाद में सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई थी।
हाई कोर्ट के उसी फैसले को मानते हुए राज्य के पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने नई विज्ञप्ति जारी की है। इस विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्य में OBC आरक्षण को 17 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत किया जा रहा है।
राज्य सरकार के सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के अलावा केवल वास्तविक रूप से पिछड़े वर्गों को ही इस आरक्षण का लाभ मिलेगा। इसके लिए 66 जातियों या श्रेणियों की पूरी सूची भी जारी की गई है।
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बताया जाता है कि सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए यह नया नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
नई विज्ञप्ति में 66 जातियों की सूची में कुर्मी, सूत्रधार, कर्मकार, कुम्भकार, स्वर्णकार, तेली और नाई जैसी जातियों के साथ-साथ जुलाहा (अंसारी-मोमिन), फकीर, हवारी या धोबी, कसाई, नस्य-शेख, पहाड़िया मुस्लिम और हजाम जैसी समुदायों को भी शामिल किया गया है।
कानून और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यह कदम आरक्षण के कानूनी अधिकार को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा उठाया गया है।