नई दिल्ली : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में आज एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई जिसका उद्देश्य आगामी नीट (अंडरग्रेजुएट) पुनः परीक्षा की तैयारियों का आकलन करना था। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने परीक्षा संचालन में पूर्ण ईमानदारी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए निर्देश दिया कि पूर्व परीक्षा प्रक्रिया में पाए गए सभी खामियों को व्यापक रूप से दूर किया जाए और उन्हें पूरी तरह समाप्त किया जाए।
उन्होंने कहा कि पुनः नीट परीक्षा को सुरक्षित, निर्बाध और पूर्ण रूप से त्रुटिरहित तरीके से कठोर सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत आयोजित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही राज्यों के जिला मजिस्ट्रेटों और पुलिस अधीक्षकों के साथ समन्वय बैठकें करने के निर्देश भी दिए गए ताकि परीक्षा व्यवस्था की प्रभावी निगरानी और मजबूत क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि परीक्षा केंद्रों पर सतर्कता और सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को यह निर्देश दिया कि छात्रों के लिए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए जिसमें परिवहन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएँ शामिल हों।
उल्लेखनीय है कि यह पुनः परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी। एक सुधारात्मक कदम के रूप में केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने पहले ही घोषणा की थी कि अगले वर्ष से नीट-यूजी परीक्षा कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) मोड में आयोजित की जाएगी।
नीट-यूजी 2026, जो 3 मई को आयोजित हुई थी, उसे 12 मई को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा रद्द कर दिया गया था, क्योंकि इसमें कथित रूप से समन्वित पेपर लीक के आरोप सामने आए थे। यह परीक्षा देश की सबसे बड़ी स्नातक चिकित्सा प्रवेश परीक्षा मानी जाती है जो भारत के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में आयोजित की गई थी। इसमें 5,400 से अधिक केंद्रों पर परीक्षा हुई थी और 22 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए थे।
इस बीच व्हिसलब्लोअर शशिकांत सुथार ने मंगलवार को दावा किया कि नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में “ठोस सबूत” मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा के कई प्रश्न पहले से प्रसारित पीडीएफ फाइलों से मेल खाते थे, जिसके बाद राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने जांच में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और राजस्थान की विशेष अभियान समूह (एसओजी) को शामिल किया।
एएनआई से बातचीत में शशिकांत सुथार ने बताया कि 3 मई को परीक्षा समाप्त होने के बाद वे प्रश्नपत्र का विश्लेषण कर छात्रों की शंकाओं का समाधान कर रहे थे तभी एक परिचित ने उन्हें एक पीडीएफ दिखाया जिसमें रसायन विज्ञान के प्रश्न थे।
उन्होंने कहा 3 मई को परीक्षा के बाद और अपने छात्रों के लिए पेपर हल करने के दौरान मेरी एक परिचित से मुलाकात हुई। उस व्यक्ति ने मुझे एक पीडीएफ दिखाया जिसमें रसायन विज्ञान के कुछ प्रश्न थे। जब मैंने उस पीडीएफ दस्तावेज के 45 प्रश्नों की तुलना नीट-यूजी प्रश्नपत्र से की तो मैं चकित रह गया क्योंकि सभी 45 प्रश्न मेल खा रहे थे।
उन्होंने आगे दावा किया कि जीवविज्ञान के प्रश्नों वाली एक और पीडीएफ की भी एक शिक्षक की सहायता से जांच की गई, जिसमें 90 प्रश्न परीक्षा प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए। उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्होंने इन विवरणों के साथ एनटीए से संपर्क किया जिसके बाद एजेंसी ने त्वरित कार्रवाई की और जांच में सीबीआई तथा एसओजी को शामिल किया गया। सुथार ने आगे कहा कि उनके अनुसार “ठोस सबूत” की उपलब्धता ने सरकार को पुनः परीक्षा कराने का निर्णय लेने के लिए मजबूर किया।