नई दिल्लीः उमर खालिद को 2020 के उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगों से जुड़े कथित साजिश मामले में अंतरिम जमानत नहीं मिली है। कड़कड़डूमा कोर्ट ने उनकी 15 दिन की अस्थायी रिहाई की याचिका खारिज कर दी।
यह आदेश अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने सुनाया। मामला क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज एफआईआर और यूएपीए समेत गंभीर धाराओं से जुड़ा हुआ है। अदालत ने साफ कहा कि मांगी गई राहत स्वीकार नहीं की जा सकती।
जमानत की मांग क्यों की गई?
याचिका में उमर खालिद ने कहा था कि उन्हें अपने चाचा खुर्शीद अहमद खान के चालीसवें दिन की रस्म (चहेलुम) में शामिल होना है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी मां की 2 जून को होने वाली सर्जरी से पहले और बाद में देखभाल की जरूरत का हवाला दिया।
यह सर्जरी अलशिफा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में निर्धारित थी। बचाव पक्ष का कहना था कि वह परिवार में सबसे बड़े बेटे हैं, इसलिए उनकी मौजूदगी जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके पिता बुजुर्ग हैं और बहनों में से कई अलग रहती हैं।
सरकार और अभियोजन पक्ष की दलीलें
अभियोजन पक्ष (दिल्ली पुलिस) ने इन दलीलों का विरोध किया। उनका कहना था कि अदालत की ओर से दी गई नरमी का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।
पुलिस ने कहा कि चहेलुम जैसे धार्मिक कार्यक्रम के लिए जेल से अस्थायी रिहाई जरूरी नहीं है, क्योंकि परिवार के अन्य सदस्य यह काम कर सकते हैं।
मां की सर्जरी को भी सामान्य और स्थानीय एनेस्थीसिया वाली प्रक्रिया बताया गया। पुलिस का कहना था कि इसमें उमर खालिद की उपस्थिति अनिवार्य नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि आरोपी पहले भी अंतरिम जमानत की सुविधा ले चुका है और अदालत की शर्तों का पालन कर चुका है।
क्या है पूरा मामला?
कोर्ट ने कहा कि हर अंतरिम जमानत आवेदन को उसके तथ्यों के आधार पर परखा जाता है। अदालत ने माना कि चहेलुम में शामिल होने की मांग पर्याप्त कारण नहीं है, खासकर तब जब मृत्यु के समय ही रिहाई की मांग नहीं की गई थी।
मां की देखभाल के तर्क पर कोर्ट ने कहा कि उनकी पांच बहनें और पिता मौजूद हैं, जो जिम्मेदारी निभा सकते हैं। साथ ही सर्जरी को अपेक्षाकृत सरल प्रक्रिया बताया गया।
अदालत ने टिप्पणी की कि “दिए गए कारण तर्कसंगत नहीं हैं”, इसलिए राहत नहीं दी जा सकती। इसी आधार पर याचिका खारिज कर दी गई।
उमर खालिद को 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था। उमर खालिद पर आरोप है कि उसने 24–25 फरवरी 2020 को भड़काऊ भाषण दिए थे, जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत दौरे पर थे।
यह मामला उस हिंसा से जुड़ा है जो नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।