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फलता सीट से TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने नामांकन वापस लिया नाम, भाजपा की जीत पक्की

दक्षिण 24 परगना जिले के फलता विधानसभा सीट से टीएमसी प्रत्याशी जहांगीर खान ने नाम वापस ले लिया है। इस सीट पर 21 मई को दोबारा चुनाव होना है। मतगणना 24 मई को होगी।

By लखन भारती

May 19, 2026 15:27 IST

कोलकाता: दक्षिण 24 परगना जिले के फलता विधानसभा सीट पर टीएमसी के प्रत्याशी जहांगीर खान ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। जहांगीर खान ने कहा कि वह अपने फलता के लोगों के हित में वोटिंग से पीछे हट रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं फलता का बेटा हूं और मैं चाहता हूं कि फलता में शांति रहे और उसका विकास हो। हमारे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी फलता के विकास के लिए एक विशेष पैकेज दे रहे हैं, इसीलिए मैं इस निर्वाचन क्षेत्र के पुनर्मतदान से खुद को अलग कर रहा हूं। बता दें कि इस सीट को लेकर बीते दिनों काफी विवाद हुआ था, जिसके बाद चुनाव आयोग ने यहां दोबारा मतदान कराने का आदेश दिया था। हालांकि इस सीट पर अभी भी चुनावी शोर जारी है।

21 मई दो दोबारा चुनाव

दरअसल, चुनाव के दौरान शिकायत मिली थी कि फलता विधानसभा सीट पर वोटर्स को टीएमसी के द्वारा धमकी दी जा रही है। मामला चुनाव आयोग तक पहुंचा, जिसके बाद चुनाव आयोग ने इस सीट पर चुनाव को ही रद्द कर दिया। चुनाव आयोग ने फलता में दोबारा चुनाव कराने का ऐलान कर दिया। अब चुनाव आयोग के मुताबिक 21 मई को फलता में दोबारा मतदान होगा और 24 मई को यहां पर चुनाव के नतीजे सामने आएंगे। फिलहाल अब टीएमसी प्रत्याशी के चुनाव से हटने के बाद मुकाबला एकतरफा माना जा रहा है।

सीएम शुभेंदु अधिकारी ने किया चुनाव प्रचार

वहीं मंगलवार को फलता के भाजपा प्रत्याशी देवांशु पांडा के समर्थन में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने चुनाव प्रचार किया। सुबह फलता के श्री श्री शिव मंदिर में पूजा अर्चना करने के बाद बनेश्वर से फलता बस स्टैंड तक चुनाव प्रचार करने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने फलता के विकास पर जोर दिया।

भाजपा की बनी सरकार

वहीं पश्चिम बंगाल में हुए चुनाव की बात करें तो राज्य में चुनावी दंगल समाप्त हो गया है। यहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार भी बन गई है। इस चुनाव में ममता बनर्जी को पर्सनली बहुत ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। ममता बनर्जी को न सिर्फ अपनी सीट पर हार का सामना करना पड़ा, बल्कि उन्हें अपनी सरकार से भी हाथ धोना पड़ा। न सिर्फ ममता बनर्जी बल्कि उनके 22 मंत्रियों को भी इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, जो पूरी पार्टी के लिए एक शर्मनाक प्रदर्शन माना जा रहा है।

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