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चुनावी भाषण बना कानूनी चुनौती, क्या अभिषेक बनर्जी को अदालत से मिलेगी राहत?

उकसाऊ बयानबाजी के आरोप में दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग लेकर तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में दायर की याचिका।

कोलकाता: विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए कथित विवादित भाषणों को लेकर तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कराने के लिए अब उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। अदालत में दाखिल याचिका में उन्होंने कानूनी संरक्षण की मांग की है।

सूत्रों के मुताबिक, इस मामले पर मंगलवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की अदालत में सुनवाई हो सकती है। अभिषेक बनर्जी की ओर से इस मामले में वकील शीर्षण्य बंद्योपाध्याय और उनके जूनियर अर्ककुमार नाग अदालत में पैरवी करेंगे।

पूरा मामला 16 मई को दर्ज हुई एक शिकायत से जुड़ा है। बागुईहाटी निवासी राजीव सरकार ने विधाननगर साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि चुनाव प्रचार के दौरान अभिषेक बनर्जी के कुछ बयान सामाजिक तनाव और हिंसा को बढ़ावा देने वाले थे।

शिकायत में दक्षिण 24 परगना के महेशतला, हुगली के आरामबाग, नदिया के हरिणघाटा और पूर्व मेदिनीपुर के नंदीग्राम में दिए गए भाषणों का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि इन भाषणों के वीडियो और संदेश ‘अभिषेक बनर्जी ऑफिशियल’ नामक फेसबुक पेज के जरिए भी प्रसारित किए गए।

एफआईआर में कहा गया है कि चुनावी मंचों से दिए गए कुछ बयान आम लोगों को भड़काने और राजनीतिक विरोधियों पर दबाव बनाने की मंशा से दिए गए थे। इसी आधार पर भारतीय न्याय संहिता और जनप्रतिनिधित्व कानून की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने कुल छह धाराएं लगाई हैं, जिनमें दो गैर-जमानती प्रावधान भी शामिल बताए जा रहे हैं।

मामले के सामने आने के बाद राज्य की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी भाषणों और सोशल मीडिया पर साझा किए जाने वाले संदेशों को लेकर कानूनी जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। अब नजर हाईकोर्ट की सुनवाई और संभावित फैसले पर टिकी है।

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