कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री निवास को लेकर एक बार फिर गंभीर स्तर पर विचार-विमर्श शुरू हो गया है। राज्य प्रशासन के भीतर यह चर्चा तेज है कि मुख्यमंत्री के लिए एक आधिकारिक सरकारी आवास की व्यवस्था दोबारा लागू की जाए। इस संबंध में कोलकाता के अलीपुर क्षेत्र में स्थित सौजन्य भवन को सबसे प्रमुख विकल्प माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, यह पूरा प्रस्ताव अभी प्रारंभिक चरण में है और इस पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।
सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद बढ़ी चिंता
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी वर्तमान में कोलकाता के चिनार पार्क स्थित अपने निजी फ्लैट में रह रहे हैं। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने इस आवास को अपेक्षाकृत असुरक्षित बताया है।
इसी सुरक्षा मूल्यांकन रिपोर्ट के बाद प्रशासन ने यह विचार शुरू किया है कि मुख्यमंत्री के लिए अधिक सुरक्षित और संरक्षित सरकारी आवास की व्यवस्था की जाए। अधिकारियों का मानना है कि उच्च स्तरीय सुरक्षा और प्रशासनिक सुविधा को देखते हुए वैकल्पिक आवास आवश्यक हो गया है।
सौजन्य भवन को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज
सौजन्य भवन को इस पूरे प्रस्ताव का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। यह भवन कोलकाता के दक्षिणी हिस्से में जजेस कोर्ट रोड पर स्थित है और लगभग एक लाख वर्ग फुट क्षेत्र में फैला हुआ है।
इस परिसर में आधुनिक सुविधाओं का पूरा ढांचा मौजूद है, जिसमें भव्य बैंक्वेट हॉल, मीडिया सेंटर, हरियाली से भरे बड़े बगीचे और लगभग 40 वाहनों की भूमिगत पार्किंग शामिल है। भवन को पहले वीवीआईपी गेस्ट हाउस के रूप में विकसित किया गया था, जहां उच्च स्तरीय बैठकों और सरकारी आयोजनों की व्यवस्था पहले से उपलब्ध है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह भवन मुख्यमंत्री निवास के रूप में इस्तेमाल करने के लिए तकनीकी और संरचनात्मक रूप से काफी उपयुक्त है, जिससे इसे जल्दी रूपांतरित किया जा सकता है।
25 साल बाद आधिकारिक मुख्यमंत्री निवास की वापसी संभव
यदि यह प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है, तो पश्चिम बंगाल में लगभग 25 वर्षों बाद एक बार फिर आधिकारिक मुख्यमंत्री निवास की परंपरा बहाल हो जाएगी।
गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु के कार्यकाल के बाद से किसी भी मुख्यमंत्री ने सरकारी आवास का उपयोग नहीं किया है। इसके बाद बुद्धदेव भट्टाचार्य और ममता बनर्जी ने अपने निजी आवासों से ही राज्य की प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाली।
ममता बनर्जी ने लंबे समय तक कालीघाट स्थित अपने निजी घर से शासन कार्य किया, जो राज्य की एक अलग प्रशासनिक परंपरा बन गई थी।
अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री की सहमति पर टिका
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों के अनुसार, सौजन्य भवन में पहले से ही प्रशासनिक बैठकें, प्रेस ब्रीफिंग और वीवीआईपी गतिविधियों की सुविधाएं मौजूद हैं, जिससे इसे मुख्यमंत्री आवास में बदलना अपेक्षाकृत सरल होगा।
हालांकि, यह पूरा प्रस्ताव अभी अंतिम मंजूरी के इंतजार में है। प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार, मुख्यमंत्री की सहमति मिलने के बाद ही इस दिशा में औपचारिक कदम आगे बढ़ाया जाएगा।
यह प्रस्ताव न केवल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि इसे राज्य में मुख्यमंत्री आवास की पुरानी व्यवस्था की संभावित वापसी के रूप में भी देखा जा रहा है।