मुंबईः संजय शिरसात ने NEET-UG पेपर लीक मामले में बड़ा बयान देते हुए कहा है कि इस घोटाले में शामिल कोचिंग सेंटर संचालकों की इमारतें तोड़ दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी काफी नहीं है, बल्कि उनकी संपत्ति और कमाई की भी जांच होनी चाहिए।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने हाल ही में शिवराज रघुनाथ मोटगांवकर को गिरफ्तार किया है, जो रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस नामक कोचिंग संस्थान चलाते थे। शिवराज पर NEET-UG पेपर लीक में शामिल होने का आरोप है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस मामले में अब तक दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे, लातूर और अहिल्यानगर समेत कई शहरों से 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
मीडिया से बातचीत में संजय शिरसात ने कहा कि छोटे गांवों तक में कोचिंग संस्थानों के बड़े-बड़े विज्ञापन दिखाई देते हैं, जबकि इतने प्रचार का खर्च बड़े नेता भी नहीं उठा सकते। उनके मुताबिक यह पैसा छात्रों से ली गई भारी फीस से आता है, इसलिए इन संस्थानों की आर्थिक जांच जरूरी है।
उन्होंने कहा कि NEET जैसे मामले देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े हैं और ऐसे अपराधों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
विपक्ष द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर शिरसात ने कहा कि यह सरकार और पार्टी का अंदरूनी मामला है, लेकिन सबसे जरूरी है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
CBI की जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ शिक्षकों और एजेंटों ने परीक्षा से पहले छात्रों के लिए कथित “स्पेशल सेशन” आयोजित किए थे। जांच एजेंसी ने पी वी कुलकर्णी और मनीषा मंधारे को भी गिरफ्तार किया है। दोनों की पहचान मनीषा वाघमारे के जरिए हुई थी, जो पहले से एजेंसी की हिरासत में है। आरोप है कि छात्रों से लाखों रुपये लेकर उन्हें परीक्षा से पहले ऐसे सवाल लिखवाए गए, जो बाद में असली NEET-UG पेपर से मेल खाते पाए गए।
NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित हुई थी। परीक्षा में करीब 23 लाख उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया था। पेपर लीक की शिकायतें सामने आने के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई और अब दोबारा परीक्षा 21 जून को कराई जाएगी।