मुंबईः मुंबई में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को जेल में बंद ढोंगी बाबा अशोक खरात को 70 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल वह नासिक जेल में बलात्कार और धोखाधड़ी के मामलों में न्यायिक हिरासत में बंद था।
ED ने उसे नासिक जेल से प्रोडक्शन वारंट के जरिए विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया था और गिरफ्तारी की अनुमति मांगी थी। अदालत ने ED की दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि मामले की गहराई से जांच और अवैध धन के स्रोत का पता लगाने के लिए गिरफ्तारी जरूरी है।
अदालत की टिप्पणी और ED की दलील
सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक और जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि आरोपी की भूमिका मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क में गंभीर है। अदालत ने माना कि आरोपी से पूछताछ और हिरासत जरूरी है ताकि पूरे धन के लेन-देन और लाभार्थियों का पता लगाया जा सके।
इसके बाद ईडी ने सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर अशोक खरात को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।
70 करोड़ रुपये के लेनदेन का आरोप
ईडी के अनुसार, अशोक खरात पर एक संगठित वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट चलाने का आरोप है। जांच में यह सामने आया है कि लगभग 70 करोड़ रुपये की अवैध कमाई को अलग-अलग बेनामी बैंक खातों के जरिए घुमाया गया।
जांच में यह भी पता चला कि उन्होंने अहिल्यानगर जिले की समता नागरी को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी में एक ही दिन में करीब 60 बैंक खाते खुलवाए और उनमें भारी लेनदेन किए गए।
धार्मिक आड़ में ठगी और संपत्ति का आरोप
ईडी का आरोप है कि अशोक खरात ने धार्मिक और ‘आशीर्वाद’ के नाम पर लोगों से पैसे वसूले। हल्दी और शहद जैसे सामान्य सामान को ‘पवित्र वस्तु’ बताकर बेचा गया और इसके जरिए बड़ी रकम जुटाई गई।
एजेंसी का कहना है कि इस पैसे से कई चल-अचल संपत्तियां खरीदी गईं, जो उसके और उसके परिवार के नाम पर दर्ज हैं।
पहले से कई गंभीर मामले दर्ज
ईडी ने 6 अप्रैल को नासिक पुलिस की एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। इस एफआईआर में वसूली, धार्मिक भ्रम फैलाने और नशीले पदार्थों के जरिए यौन शोषण जैसे आरोप शामिल हैं।
अशोक खरात को 18 मार्च को नासिक पुलिस ने एक महिला की शिकायत पर गिरफ्तार किया था, जिसमें तीन साल तक बलात्कार का आरोप लगाया गया था। खरात के खिलाफ कई अलग-अलग एफआईआर दर्ज हैं।
एसआईटी की जांच जारी
नासिक और अहिल्यानगर जिलों में कुल 12 मामलों की जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है। इसमें यौन शोषण और वित्तीय धोखाधड़ी दोनों पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है।
ईडी अब अदालत से रिमांड की मांग करेगी ताकि पूरे मनी ट्रेल, बेनामी खातों और कथित नेटवर्क के अन्य लोगों की पहचान की जा सके। जांच एजेंसी का कहना है कि इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
कोर्ट की अनुमति के बाद ईडी ने की गिरफ्तारी, 70 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन और वसूली रैकेट का आरोप है।