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दक्षिण कोरिया पहुंचे राजनाथ सिंह, रणनीतिक रक्षा साझेदारी पर होगा मंथन

इंडो-पैसिफिक में शांति और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर रहेगा फोकस

By डॉ. अभिज्ञात

May 19, 2026 22:20 IST

सियोलः रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार को दक्षिण कोरिया पहुंचे। यह उनकी 18 से 21 मई तक चल रही दो देशों की महत्वपूर्ण यात्रा का दूसरा चरण है। सियोल पहुंचने पर भारत के दक्षिण कोरिया स्थित राजदूत गौरांगलाल दास और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इसके साथ ही राजधानी सियोल में उनकी उच्चस्तरीय बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया।

रक्षा मंत्री ने 18 और 19 मई को वियतनाम का आधिकारिक दौरा किया था। इसके बाद वे 18 से 21 मई तक दक्षिण कोरिया के दौरे पर पहुंचे हैं। इस बहु-देशीय यात्रा का उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना और सुरक्षा संबंधों को नई दिशा देना है।

अपने दौरे के उद्देश्यों को लेकर रक्षा मंत्री ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा था कि उनका ध्यान रणनीतिक सैन्य सहयोग को और गहरा करने, रक्षा उद्योग से जुड़े साझेदारी संबंधों को मजबूत बनाने तथा समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने पर रहेगा। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का मकसद इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता को प्रोत्साहित करना है।

रक्षा मंत्री की यह अहम विदेश यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब नई दिल्ली वैश्विक सुरक्षा साझेदारियों को और व्यापक बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। यह दौरा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती सक्रियता को भी दर्शाता है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और दक्षिण कोरिया की इंडो-पैसिफिक रणनीति के बीच बढ़ते तालमेल को भी रेखांकित करता है।

हनोई चरण की यात्रा पूरी करने के बाद अब राजनाथ सिंह सियोल में द्विपक्षीय रक्षा संबंधों की समीक्षा करेंगे और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा करेंगे। वियतनाम दौरे का विशेष महत्व इसलिए भी रहा क्योंकि इस वर्ष भारत और वियतनाम के व्यापक रणनीतिक साझेदारी समझौते के दस वर्ष पूरे हो रहे हैं।

दक्षिण कोरिया की राजधानी में अपने प्रवास के दौरान रक्षा मंत्री वहां के रक्षा मंत्री आह्न ग्यु-बैक के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरान क्षेत्रीय स्थिरता और साझा सुरक्षा चुनौतियों से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके अलावा वे रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन (डीएपीए) के मंत्री ली योंग-चोल से भी मुलाकात करेंगे। साथ ही भारत-कोरिया व्यापार गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें रक्षा औद्योगिक सहयोग और निवेश के अवसरों को बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा।

दौरे के अंतिम चरण में 21 मई को भारत और दक्षिण कोरिया संयुक्त रूप से एक विशेष भारतीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन करेंगे। यह स्मारक कोरियाई युद्ध के दौरान सेवा देने वाले भारतीय सेना के जवानों की वीरता को समर्पित है। इसमें विशेष रूप से 60 पैराशूट फील्ड एम्बुलेंस यूनिट और कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया के योगदान को सम्मान दिया गया है, जिन्होंने युद्ध के बाद युद्धबंदियों की वापसी प्रक्रिया की निगरानी में अहम भूमिका निभाई थी।

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