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छत्तीसगढ़ के बस्तर में पहली बार सेंट्रल जोनल काउंसिल बैठक, चार राज्यों के सीएम रहे मौजूद

चार राज्यों के बीच विवाद समाप्त, केंद्र-राज्य सहयोग को बताया बड़ी उपलब्धि

जगदलपुर : छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में पहली बार केंद्रीय क्षेत्रीय परिषद (सेंट्रल जोनल काउंसिल) की बैठक आयोजित की गई, जो 31 मार्च को नक्सल-मुक्त भारत की घोषणा के बाद इस क्षेत्र में आयोजित पहली बैठक है। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की।बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित सदस्य राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी और केंद्र सरकार के अधिकारी उपस्थित रहे।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अब चारों राज्यों के बीच या इन राज्यों और केंद्र सरकार के बीच कोई विवाद शेष नहीं है। अमित शाह ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा, “यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। छत्तीसगढ़ लगभग सात राज्यों को जोड़ता है, जिससे पूरा मध्य क्षेत्र रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। यह पूरा क्षेत्र अब न केवल नक्सल-मुक्त हुआ है, बल्कि विवाद-मुक्त भी हो गया है, जो हम सभी के लिए अत्यंत खुशी की बात है।”

उन्होंने कहा, “हमारी लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है क्योंकि नक्सल प्रभावित क्षेत्र लगभग पाँच दशकों से विकास की दौड़ में पीछे रह गए हैं।”उन्होंने आगे कहा कि “जब तक इन क्षेत्रों को विकास के मामले में देश के बाकी हिस्सों के बराबर नहीं लाया जाता, तब तक हमारी लड़ाई समाप्त नहीं होगी।”

अमित शाह ने कहा कि भारत को नक्सल-मुक्त बनाने का पूरा श्रेय हमारे सुरक्षा बलों के जवानों के परिश्रम और साहस को जाता है। उन्होंने कहा, “हमारी एजेंसियों ने अत्यंत सटीक जानकारी जुटाई और सभी राज्यों की पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के साथ समन्वय करके हर सूचना पर समय पर और निर्णायक कार्रवाई की। इसके साथ ही ‘होल ऑफ गवर्नमेंट अप्रोच’ के तहत सभी राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के सभी विभागों ने मिलकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास पहुंचाने का कार्य किया।”

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार को नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में जिस भी सहायता की आवश्यकता थी, उसे गृह मंत्रालय के साथ समन्वय कर उपलब्ध कराया गया। “जहां भी नेतृत्व की आवश्यकता थी, मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने नेतृत्व प्रदान किया। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि आज बस्तर नक्सल-मुक्त हो चुका है।गृह मंत्री ने बताया कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच क्षेत्रीय परिषदों की केवल 11 बैठकें हुई थीं, जबकि 2014 से 2026 के बीच यह संख्या बढ़कर 32 हो गई है।

उन्होंने कहा कि 2004 से 2014 के बीच स्थायी समिति की केवल 14 बैठकें हुई थीं, जबकि 2014 से 2026 के बीच यह संख्या बढ़कर 35 हो गई है, यानी लगभग ढाई गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि 2004 से 2014 के बीच केवल 569 मुद्दों पर चर्चा हुई थी, जबकि 2014 से 2026 के बीच 1,729 मुद्दों पर चर्चा हुई है, जिनमें से लगभग 80 प्रतिशत का समाधान भी हो चुका है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लंबित मुद्दे केवल निगरानी से जुड़े हैं, जिनमें किसी प्रकार का विवाद नहीं है।

अमित शाह ने सभी चार राज्यों के सदस्यों से जल जीवन मिशन-2 पर ध्यान केंद्रित करने और हर घर तक नल से जल सुनिश्चित करने का आग्रह किया। इसके अलावा उन्होंने स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक कल्याण को इन राज्यों के लिए अत्यंत संवेदनशील विषय बताया।

केंद्रीय गृह मंत्री ने सभी मुख्यमंत्रियों और मुख्य सचिवों से कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में केंद्र सरकार के साथ मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में अभी भी बहुत कार्य करने की आवश्यकता है ताकि स्कूल छोड़ने की दर कम की जा सके और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सके। वित्तीय समावेशन और ऊर्जा क्षेत्र के सुधार इस विकासशील क्षेत्र को पूर्ण विकसित क्षेत्र में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने शहरी नियोजन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन और ऊर्जा सुधारों पर और अधिक गति से काम करने पर जोर दिया तथा कहा कि “कम से कम 50 प्रतिशत ध्यान ग्रामीण विकास और जनसशक्तिकरण योजनाओं पर केंद्रित होना चाहिए।”

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि बैंकिंग सुविधाएं पाँच किलोमीटर के दायरे में उपलब्ध कराई जाएं, क्योंकि सभी सरकारी योजनाएं प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) पर आधारित हैं। यौन अपराधों से जुड़े मामलों में समय पर डीएनए परीक्षण, पाँच वर्षों से अधिक समय से लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए उच्च न्यायालयों द्वारा विशेष अदालतों की स्थापना, गंभीर अपराधों के प्रति प्रशासन की गंभीरता, राज्य स्तरीय 1930 हेल्पलाइन का गृह मंत्रालय के मॉडल के अनुसार संचालन और राज्य हेल्पलाइन कॉल सेंटरों के अद्यतन जैसे मुद्दों पर भी गृह मंत्री ने जोर दिया।

उन्होंने कहा कि मिलावट के मामलों में जहां भी मामला दर्ज हो और दंड लगाया जाए, उसकी व्यापक सार्वजनिक जानकारी दी जानी चाहिए ताकि जनता को ऐसे दुकानों के बारे में जागरूकता हो सके।उन्होंने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली की तीन “नवीन न्याय संहिता” के प्रभावी कार्यान्वयन के साथ-साथ कई अन्य मुद्दे भी हैं, जिन पर राज्यों को अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, “जैसे हमने देश को नक्सलवाद से मुक्त किया है, वैसे ही हमें यह लक्ष्य भी प्राप्त करना होगा कि सभी आपराधिक मामलों का निपटारा—सुप्रीम कोर्ट तक—2029 से पहले तीन वर्षों के भीतर किया जाए। यह बैठक गृह मंत्रालय के अधीन अंतर-राज्य परिषद सचिवालय द्वारा आयोजित की गई थी, जिसमें छत्तीसगढ़ सरकार मेजबान थी।

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