पटनाः जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपने रहने और काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव किया है। उन्होंने पटना स्थित अपना पुराना आवास छोड़कर अब पटना के बाहरी इलाके में स्थित बिहार निर्माण आश्रम में रहने का निर्णय लिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी विधानसभा चुनाव तक वे वहीं रहेंगे और उसी जगह से अपनी पूरी राजनीतिक गतिविधियों का संचालन करेंगे। यह आश्रम आईआईटी-पटना के पास स्थित है, जिसे उन्होंने अपने नए कार्य केंद्र के रूप में चुना है।
पहले ‘शेखपुरा हाउस’ से चल रहा था काम
अब तक प्रशांत किशोर पटना एयरपोर्ट के पास स्थित ‘शेखपुरा हाउस’ से अपनी राजनीतिक गतिविधियां संचालित कर रहे थे। यह भवन जन सुराज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह के परिवार से जुड़ा हुआ है।
लेकिन अब उन्होंने इस व्यवस्था को बदलते हुए खुद को एक अलग और अधिक सादगीपूर्ण माहौल में स्थापित करने का फैसला किया है, ताकि वे संगठन विस्तार और चुनावी तैयारी पर पूरी तरह ध्यान दे सकें।
बिहार की राजनीति में बदलाव का दावा
दरभंगा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि उनका उद्देश्य बिहार की राजनीति में एक नया विकल्प तैयार करना है। उन्होंने बताया कि वे अब अधिक समय जनता के बीच रहकर जमीनी स्तर की समस्याओं को समझने और संगठन को मजबूत करने में लगा रहे हैं।
उनका कहना है कि यह कदम केवल निवास स्थान बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी राजनीतिक कार्यशैली का हिस्सा है, जिससे वे चुनाव से पहले पार्टी को मजबूत स्थिति में ला सकें।
नीतीश कुमार पर निशाना और जनता से अपील
प्रशांत किशोर ने बातचीत के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राज्य में आर्थिक कारणों से होने वाले पलायन को रोकने में सरकार पूरी तरह सफल नहीं रही है और हालात लगातार चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक फैसलों में जनता के हितों के बजाय अन्य प्राथमिकताएं हावी रही हैं।
साथ ही उन्होंने बिहार के मतदाताओं से अपील की कि वे वोट देते समय जाति, धर्म या किसी भी तरह के प्रलोभन से प्रभावित न हों। उन्होंने कहा कि लोगों को अपने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर मतदान करना चाहिए।
आर्थिक हालात और भविष्य को लेकर चेतावनी
प्रशांत किशोर ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है और उर्वरक की उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है।
उनके अनुसार, अगर हालात बिगड़े तो किसानों और आम लोगों को खाद की कमी और बढ़ती कीमतों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर का यह फैसला केवल व्यक्तिगत बदलाव नहीं है, बल्कि जन सुराज पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। वे अब सीधे जनता के बीच रहकर संगठन को विस्तार देने और चुनावी तैयारी को धार देने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।