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शुभेंदु अधिकारी ने किया ‘डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट’ नीति का ऐलान, CAA से बाहर लोगों पर कार्रवाई

पश्चिम बंगाल सरकार ने BSF को सौंपी 27 किलोमीटर सीमा क्षेत्र की जमीन।

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले जिस घुसपैठ के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजनीतिक अभियान का प्रमुख विषय बनाया था, अब राज्य की भाजपा सरकार ने उसी दिशा में बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति लागू करने की घोषणा करते हुए कहा कि जो लोग नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के दायरे में नहीं आते, उन्हें घुसपैठिया माना जाएगा और राज्य पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सीमा सुरक्षा बल यानी Border Security Force (BSF) के हवाले करेगी।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार ने बांग्लादेश सीमा पर कंटीले तार लगाने के लिए 27 किलोमीटर जमीन औपचारिक रूप से BSF को सौंप दी है। पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश से लगभग 2200 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है। इनमें से करीब 1600 किलोमीटर क्षेत्र में पहले ही बाड़ लग चुकी है, जबकि लगभग 600 किलोमीटर क्षेत्र अभी भी शेष है।

मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 555 किलोमीटर क्षेत्र में जमीन आसानी से उपलब्ध कराई जा सकती थी लेकिन तुष्टिकरण की राजनीति के कारण ऐसा नहीं किया गया।

इसके बाद शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में घुसपैठियों के खिलाफ नई कानूनी व्यवस्था लागू करने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि जो लोग CAA के दायरे में नहीं आते, उन्हें घुसपैठिया माना जाएगा। मुख्यमंत्री के मुताबिक केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष मई महीने में राज्य सरकार को इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 से जुड़ा एक नोटिफिकेशन भेजा था। इसमें स्पष्ट कहा गया था कि 31 दिसंबर 2024 के बाद पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के अलावा अन्य लोगों को वापस भेजा जाएगा। आरोप लगाया गया कि पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार ने इस नियम को लागू नहीं किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी, मतदाता सूची से उनके नाम हटाए जाएंगे और फिर उन्हें देश से बाहर भेजा जाएगा। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि राज्य पुलिस पहले उन्हें गिरफ्तार करेगी और उसके बाद BSF को सौंप देगी।

शुभेंदु अधिकारी ने यह भी दावा किया कि राज्य में कानून-व्यवस्था से जुड़े कई अपराधों, ‘लव जिहाद’ और महिला सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जिन असामाजिक गतिविधियों में वृद्धि दिखाई दे रही है, उनमें शामिल अधिकांश लोग बांग्लादेश से आए घुसपैठिए हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सीमावर्ती इलाकों में प्रशासनिक निगरानी और अधिक सख्त की जाएगी। राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन मिलकर समन्वय के साथ काम करेंगे। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती जिलों के प्रशासन के साथ नियमित तालमेल बनाकर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही बांग्लादेश सीमा से जुड़े जिलों में नियमित प्रशासनिक बैठकें आयोजित करने की भी घोषणा की गई।

मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद मतुआ समुदाय से जुड़े संगठनों और नेताओं में खुशी का माहौल देखा गया। केंद्रीय राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह बहुत अच्छा कदम है। उन्होंने कहा कि जो लोग अवैध रूप से आए हैं, वे पाकिस्तान, अफगानिस्तान या बांग्लादेश लौट जाएं, या जहां चाहें जाएं, लेकिन भारत में रहना है तो नागरिकता लेनी होगी।

शांतनु ठाकुर ने पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उसी सरकार ने घुसपैठियों को राज्य में प्रवेश करने दिया था। बाद में उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ बैठक भी की।

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