कोलकाताः कोलकाता में नगर निगम की ओर से अवैध निर्माण और बकाया टैक्स को लेकर चल रही कार्रवाई ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। शहर के कई इलाकों में नोटिस चिपकाए जाने के बाद यह मामला अब सियासी बहस का मुद्दा बन गया है। आरोप है कि कुछ संपत्तियों पर, जिनमें कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी और उनके परिवार तथा एक निजी कंपनी से जुड़ी इमारतें शामिल हैं, नगर निगम ने अवैध निर्माण और टैक्स से जुड़े नोटिस जारी किए हैं।
नगर निगम की टीम ने कालीघाट रोड और हरीश मुखर्जी रोड समेत कई जगहों पर जाकर नोटिस लगाए। कुछ जगहों पर लगाए गए नोटिस को हटाए जाने की भी शिकायत सामने आई है, जिस पर निगम की ओर से जांच की बात कही गई है। अधिकारियों का कहना है कि अवैध निर्माण और टैक्स बकाया मामलों की जांच नियमों के तहत की जा रही है और जरूरत पड़ने पर आगे कानूनी कार्रवाई भी होगी।
इस पूरे मामले पर कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने अलग-अलग बयान दिए। पहले उन्होंने कहा कि उन्हें इन नोटिसों की जानकारी नहीं थी। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया है और नगर निगम के बिल्डिंग विभाग अपने स्तर पर कार्रवाई करता है। उन्होंने यह भी कहा कि हर नोटिस की जानकारी मेयर को होना जरूरी नहीं है और यह उनका प्रत्यक्ष नियंत्रण क्षेत्र नहीं है। उन्होंने किसी भी व्यक्तिगत संपत्ति के मामले पर टिप्पणी करने से भी इनकार किया।
इधर, भाजपा और विपक्षी दलों ने नगर निगम की इस कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि अवैध निर्माण पर सख्त कदम उठाए जाने चाहिए और कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। पश्चिम बंगाल सरकार की मंत्री अग्निमित्रा ने कहा कि कानून सभी के लिए बराबर है और यदि किसी के पास वैध दस्तावेज हैं तो उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई जारी रहनी चाहिए और किसी को भी नियमों से ऊपर नहीं समझा जा सकता।
तृणमूल कांग्रेस की ओर से जारी बयान में इन आरोपों को खारिज किया गया है। पार्टी ने कहा कि भाजपा की ओर से जो सूचियां और दावे सामने लाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह से असत्य और बिना आधार के हैं। तृणमूल ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि बिना पुष्टि के किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए। पार्टी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि किसी भी संपत्ति की जानकारी या नोटिस को लेकर फैलाए जा रहे दावे सही नहीं हैं और इसकी जांच जरूरी है।
नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि अवैध निर्माण और टैक्स बकाया से जुड़े मामलों की जांच आगे भी जारी रहेगी और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम ने कोलकाता की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जहां प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप एक साथ चल रहे हैं।