ओस्लो : नॉर्वे के पत्रकार हेले लिंग ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े सवालों को लेकर विवाद खड़ा कर दिया है। मंगलवार को नॉर्वे के प्रधानमंत्री योनेस गार स्टोरे के साथ आयोजित संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग के दौरान उन्होंने अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल कर दिया, जिसमें उन्होंने पूछा कि क्या वे “दुनिया के सबसे स्वतंत्र मीडिया” से कोई सवाल नहीं लेंगे। यह सवाल उन्होंने ऊँची आवाज में उठाया हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसे सुना या नहीं।
इसके अगले दिन बुधवार को हेले लिंग ने NDTV को एक साक्षात्कार दिया जिसमें उनके अपने मीडिया स्टैंड पर ही सवाल उठने लगे। इस इंटरव्यू में भारतीय पत्रकार द्वारा उनसे कई तीखे सवाल पूछे गए जिनमें नॉर्वे में प्रेस स्वतंत्रता, भारत के बारे में उनकी समझ और उनके पिछले बयान शामिल थे। इन सवालों के सामने हेले लिंग कई बार असहज दिखीं और कुछ सवालों से बचने की कोशिश करती नजर आई। यहां तक कि नॉर्वे के अखबार “आफ्टेनपोस्तेन” में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “सापेरे” के रूप में दिखाए जाने की आलोचना पर भी उनका जवाब स्पष्ट नहीं था।
हेले लिंग ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जवाब देंगे। इस पर सवाल उठे कि क्या उन्होंने जानबूझकर सुर्खियों में आने के लिए यह कदम उठाया। जब NDTV इंटरव्यू में उनसे यह पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सवाल पूछना उनका काम है और उन्हें लगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने यह सवाल रखना जरूरी था। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में उन्हें फिर से प्रधानमंत्री से सवाल पूछने का अवसर मिलेगा या नहीं, यह उन्हें नहीं पता, इसलिए उन्होंने मौके का लाभ उठाया।
हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने इस मुद्दे पर नॉर्वे के विदेश मंत्रालय से कोई आधिकारिक आपत्ति दर्ज नहीं कराई। प्रेस फ्रीडम इंडेक्स को लेकर भी चर्चा हुई, जिसमें नॉर्वे को पहले स्थान पर और भारत को 157वें स्थान पर रखा गया है। कई लोग इस रैंकिंग की पद्धति पर सवाल उठा रहे हैं। इस पर हेले लिंग कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सकीं और केवल इतना कहा कि कुछ देशों की स्थिति पर फिर से विचार किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “सापेरे” के रूप में दिखाए जाने के मामले पर भी उन्होंने टिप्पणी से बचते हुए कहा कि वे पूरी जानकारी के बिना कुछ नहीं कहना चाहतीं। जब उनसे भारत के बारे में उनकी जानकारी पूछी गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि वे कभी भारत नहीं गईं और देश के बारे में उनकी जानकारी सीमित है, जो मुख्यतः रिपोर्टों और प्रेस फ्रीडम इंडेक्स पर आधारित है।