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एटीएफ की कीमत दोगुनी होने से बिजनेस जेट और हेलिकॉप्टर किराये में भारी उछाल

ईंधन संकट के बीच सितंबर से राज्य सरकार को निजी विमान सेवाओं पर देना पड़ सकता है ज्यादा पैसा

By रजनीश प्रसाद

May 21, 2026 11:56 IST

कोलकाता : हॉर्मुज जलडमरूमध्य से ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने के कारण विमान ईंधन यानी एटीएफ (एविएशन टरबाइन फ्यूल) की कीमतों में भारी उछाल आ गया है। अप्रैल के बाद से एटीएफ के दाम लगभग 100 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं जिसका असर अब विमान सेवाओं और छोटे निजी विमानों के किराये पर साफ दिखाई दे रहा है। घरेलू उड़ानों में केंद्र सरकार ने अभी तक ईंधन मूल्य वृद्धि को नियंत्रित रखा है लेकिन छोटे विमान और हेलिकॉप्टरों के संचालन खर्च तेजी से बढ़ गए हैं।

देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्री व्यस्त कार्यक्रमों के कारण नियमित घरेलू उड़ानों पर निर्भर नहीं रहते और निजी विमानों का उपयोग करते हैं। पश्चिम बंगाल सरकार ने भी पांच वर्ष पहले मुख्यमंत्री के उपयोग के लिए फाल्कन 2000 विमान लीज पर लिया था। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद बुधवार को शुभेंदु अधिकारी इसी विमान से बागडोगरा गए। इससे पहले वह इसी आठ सीट वाले विमान से असम में मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के शपथ ग्रहण समारोह में भी पहुंचे थे।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार दिल्ली की जिस कंपनी से यह विमान किराये पर लिया गया है उसके साथ राज्य सरकार का समझौता इस वर्ष अगस्त में समाप्त हो रहा है। इसके बाद नए टेंडर की प्रक्रिया शुरू की गई है लेकिन मौजूदा हालात ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि विमान का प्रति घंटे किराया अचानक करीब दो लाख रुपये बढ़ गया है। ऐसे समय में जब केंद्र और राज्य सरकारें खर्च कम करने की बात कर रही हैं सितंबर से नए लीज़ समझौते के तहत सरकार को अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ सकती है।

नवान्न सूत्रों का कहना है कि फिलहाल पुरानी दरों पर ही भुगतान किया जा रहा है। इससे निजी विमान कंपनी पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है क्योंकि उसे बाजार से अब दोगुनी कीमत पर एटीएफ खरीदना पड़ रहा है जबकि अगस्त तक पुराने समझौते के अनुसार ही सेवा देनी होगी।

समझौते के मुताबिक राज्य सरकार को हर महीने कम से कम 45 घंटे का किराया देना अनिवार्य है। विमान यदि इससे कम समय भी उड़ान भरे तब भी 45 घंटे का भुगतान करना होगा। इससे अधिक उड़ान होने पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है। वर्तमान में राज्य सरकार इस फाल्कन विमान के लिए प्रति घंटे लगभग साढ़े पांच लाख रुपये दे रही है। इसमें ईंधन, विमान पार्किंग, पायलटों का वेतन, उनके होटल और भोजन का खर्च तथा रखरखाव जैसी सभी जिम्मेदारियां संबंधित कंपनी की होती हैं। राज्य सरकार केवल तय राशि का भुगतान करती है।

एविएशन विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले दो महीनों में मध्यम आकार के एग्जीक्यूटिव जेट का किराया बढ़कर लगभग साढ़े सात लाख रुपये प्रति घंटा पहुंच गया है। ऐसे में नए टेंडर में इससे कम दर पर कोई कंपनी बोली लगाएगी, इसकी संभावना बेहद कम है।

मुख्यमंत्री के आवागमन के लिए राज्य सरकार ने एयरबस कंपनी का एक हेलिकॉप्टर भी किराये पर ले रखा है। सूत्रों के मुताबिक उसकी लीज़ शर्तें भी लगभग समान हैं। अंतर केवल इतना है कि हेलिकॉप्टर का किराया करीब तीन लाख रुपये प्रति घंटा है। हालांकि पिछले दो महीनों में उसका बाजार मूल्य भी काफी बढ़ चुका है। इस हेलिकॉप्टर का समझौता वर्ष 2027 तक है लेकिन कंपनी ने पहले ही किराया बढ़ाने का अनुरोध कर दिया है।

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