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“एन इनिया पोन निलावे” कॉपीराइट केस में सारेगामा इंडिया लिमिटेड को मिली राहत

कोर्ट ने कहा- इलैयाराजा के पास केवल धुन का अधिकार, बोल और रिकॉर्डिंग पर नहीं। रीक्रिएटेड वर्जन के इस्तेमाल को लेकर शुरू हुआ था विवाद।

By डॉ. अभिज्ञात

May 21, 2026 14:43 IST

साउथ के दिग्गज संगीतकार इलैयाराजा और म्यूजिक कंपनी सारेगामा इंडिया लिमिटेड के बीच चल रही कानूनी लड़ाई अब दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने मशहूर तमिल गीत “एन इनिया पोन निलावे” को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि इलैयाराजा इस गाने के बोल और मूल साउंड रिकॉर्डिंग के अधिकार किसी तीसरे पक्ष को नहीं दे सकते।

यह मामला तमिल फिल्म मूडु पानी के इस आइकॉनिक गाने से जुड़ा है, जिसे हाल ही में आने वाली फिल्म अघथिया में नए अंदाज में इस्तेमाल किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हुआ। म्यूजिक कंपनी सारेगामा इंडिया लिमिटेड ने दावा किया कि फिल्म के टीजर में गाने की मूल धुन और बोल का इस्तेमाल किया गया है, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंच गया।

जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने जनवरी 2025 में दिए गए सिंगल जज के आदेश को बरकरार रखा। अदालत ने माना कि इलैयाराजा के पास इस गीत की म्यूजिकल कंपोजिशन यानी धुन पर अधिकार जरूर है लेकिन गीत के बोल और साउंड रिकॉर्डिंग के अधिकार उनके पास नहीं हैं।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कॉपीराइट कानून के तहत किसी गीत की धुन का अधिकार संगीतकार के पास रह सकता है लेकिन फिल्म में इस्तेमाल हुई साउंड रिकॉर्डिंग का मालिक निर्माता होता है। ऐसे में इलैयाराजा केवल संगीत हिस्से का इस्तेमाल या उसका नया रूप तैयार कर सकते हैं लेकिन वे गीत के बोल या ओरिजिनल रिकॉर्डिंग के अधिकार किसी और को नहीं सौंप सकते।

अदालत ने यह भी कहा कि इलैयाराजा ने वर्ष 2023 में वेल्स फिल्म इंटरनेशनल के साथ जो समझौता किया था, उसमें मूल गीत और उसकी रिकॉर्डिंग से जुड़े अधिकार देने की बात कही गई थी। लेकिन चूंकि उनके पास उन अधिकारों का स्वामित्व ही नहीं था इसलिए उन्हें ट्रांसफर भी नहीं किया जा सकता।

हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इलैयाराजा का संगीत रचना पर स्वतंत्र कॉपीराइट अब भी सुरक्षित है। यानी गीत की मूल धुन पर उनका अधिकार बना रहेगा, भले ही वह किसी फिल्म का हिस्सा क्यों न हो।

अदालत ने यह भी माना कि फिल्म और उसके भीतर मौजूद संगीत रचना के कॉपीराइट अलग-अलग हो सकते हैं। कोर्ट के मुताबिक साल 1980 में फिल्म निर्माता और ग्रामोफोन कंपनी ऑफ इंडिया जिसे अब सारेगामा इंडिया लिमिटेड के नाम से जाना जाता है- के बीच हुए समझौते के जरिए कंपनी ने साउंड रिकॉर्डिंग के अधिकार कानूनी रूप से हासिल किए थे।

पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अघथिया के टीजर में “एन इनिया पोन निलावे” का रीक्रिएटेड वर्जन सुनाई दिया। इसके बाद सारेगामा इंडिया लिमिटेड ने जनवरी 2025 में कानूनी नोटिस भेजकर इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। इससे पहले सिंगल जज भी रीक्रिएटेड वर्जन के इस्तेमाल पर रोक लगा चुके थे और कहा था कि मूडु पानी के गानों की साउंड रिकॉर्डिंग, साहित्यिक और संगीत रचनाओं के अधिकार सारेगामा इंडिया लिमिटेड के पास हैं।

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