कोलकाताः उत्तर–पूर्व भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले बेहद अहम रणनीतिक इलाके “चिकन नेक” की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार सक्रिय हो गई है। उत्तर बंगाल के मालदा, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर, सिलीगुड़ी तथा जलपाईगुड़ी के कुछ हिस्सों को मिलाकर बने इस संवेदनशील कॉरिडोर में सेना और सीमा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है।
सूत्रों के मुताबिक इस क्षेत्र में एक विशेष सैन्य बेस और बीएसएफ ढांचे के विस्तार की तैयारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर के करीब 120 एकड़ जमीन केंद्र को सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। इसी मुद्दे पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी जल्द दिल्ली दौरे पर जा सकते हैं, जहां उनकी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद केंद्र ने इस इलाके की सुरक्षा पर खास ध्यान देना शुरू किया है। यह कॉरिडोर नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं के बेहद करीब होने के कारण रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि दुश्मन देश या आतंकी संगठन सीमावर्ती इलाकों का इस्तेमाल कर भारत विरोधी गतिविधियों की कोशिश कर सकते हैं।
सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर–पूर्व के सात राज्यों तक पहुंच का यह मुख्य मार्ग होने के कारण “चिकन नेक” की सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ी हुई है। इसी वजह से यहां बीएसएफ चेकपोस्ट, निगरानी ढांचा और सैन्य उपस्थिति बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने हाल ही में उत्तर बंगाल का दौरा कर इलाके की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की थी। वहीं राज्य सरकार की ओर से जमीन हस्तांतरण से जुड़ी प्रक्रियाओं में तेजी आने के बाद अब परियोजना के अमल का रास्ता काफी हद तक साफ माना जा रहा है।