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भारत और अमेरिका बने स्वाभाविक साझेदार, निवेश और तकनीक से बढ़ा सहयोग: पीयूष गोयल

अमेरिकी कंपनियों से 60 अरब डॉलर से अधिक निवेश प्रतिबद्धताओं के बीच सहयोग और गहरा हुआ।

By श्वेता सिंह

May 21, 2026 18:44 IST

नई दिल्लीः नई दिल्ली में आयोजित अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स के वार्षिक लीडरशिप सम्मेलन में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और अमेरिका के रिश्तों को “प्राकृतिक साझेदारी” बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है और सहयोग का दायरा तेजी से बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि पूरक हैं। यही वजह है कि तकनीक, रक्षा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वांटम कंप्यूटिंग और मेडिकल डिवाइस जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच साझेदारी लगातार आगे बढ़ रही है।

निवेश और कॉरपोरेट भरोसे में बढ़ोतरी

मंत्री ने बताया कि पिछले छह महीनों में अमेरिकी कंपनियों की ओर से भारत में लगभग 60 अरब डॉलर से अधिक के निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं। इनमें अमेज़न (Amazon) और गूगल (Google) जैसी बड़ी कंपनियों के बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर निवेश भी शामिल हैं, जो भारत की अर्थव्यवस्था पर बढ़ते भरोसे को दर्शाते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत आज वैश्विक निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बन चुका है क्योंकि यहां बड़े पैमाने पर बाजार, कुशल मानव संसाधन और मजबूत डिजिटल व नीति आधारित ढांचा मौजूद है।

भारत की आर्थिक ताकत और वैश्विक भूमिका

पीयूष गोयल ने कहा कि भारत का 1.4 अरब उपभोक्ताओं का विशाल बाजार, बढ़ती आय और तेजी से विस्तार करता मध्यम वर्ग वैश्विक कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है। इससे नवाचार और उपभोग दोनों को बढ़ावा मिल रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब सिर्फ असेंबली हब नहीं रहा, बल्कि डिजाइन, इनोवेशन और बौद्धिक संपदा निर्माण का केंद्र बनता जा रहा है।

औद्योगिक विकास और नई योजनाएं

उन्होंने बताया कि सरकार “भव्य” योजना के तहत 100 नए औद्योगिक पार्क विकसित कर रही है। इन पार्कों में केवल फैक्ट्रियां ही नहीं, बल्कि आवास, मनोरंजन और सामाजिक सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी, जिससे एक समग्र औद्योगिक माहौल तैयार होगा।

साथ ही उन्होंने मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इनसे देश में नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति और डिजिटल अपनाने की गति बढ़ी है।

वैश्विक क्षमता केंद्र और तकनीकी प्रगति

उन्होंने बताया कि भारत में इस समय 2,100 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स काम कर रहे हैं, जिनमें 2.3 मिलियन से ज्यादा लोग कार्यरत हैं और जो लगभग 98 अरब डॉलर का राजस्व उत्पन्न कर रहे हैं।

इसके अलावा, नवीकरणीय ऊर्जा और 5G नेटवर्क विस्तार से भारत का डिजिटल और औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत हो रहा है, जिससे डेटा सेंटर और उन्नत उत्पादन क्षेत्र को बढ़ावा मिल रहा है।

पीएम गति शक्ति और भविष्य की दिशा

मंत्री ने पीएम गति शक्ति योजना को एक डेटा-आधारित इन्फ्रास्ट्रक्चर मॉडल बताया, जो विभिन्न परियोजनाओं के बीच समन्वय बनाकर लॉजिस्टिक्स को आसान और तेज बनाता है।

अंत में उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है और इसके लिए लगातार सुधार, बुनियादी ढांचे का विकास और वैश्विक साझेदारियां अहम भूमिका निभा रही हैं।

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