कोलकाता : गुरुवार सुबह से रवींद्र सरोवर स्टेडियम का माहौल पूरी तरह बदल गया। अचानक स्टेडियम के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया गया और सभी तरह की खेल गतिविधियां तथा अभ्यास सत्र बंद कर दिए गए। इस अचानक उठाए गए कदम से खिलाड़ियों, क्लबों और खेल जगत से जुड़े लोगों के बीच कई सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार यह फैसला सरकार की ओर से लिया गया है। गुरुवार सुबह करीब साढ़े दस बजे स्टेडियम को बंद कर दिया गया। इस अप्रत्याशित फैसले के बाद खेल जगत में काफी हलचल मच गई है क्योंकि इस स्टेडियम में हर दिन कई छोटे फुटबॉल क्लब अभ्यास करते हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में एथलीट भी नियमित रूप से यहां प्रशिक्षण लेने आते हैं। ऐसे में अचानक स्टेडियम बंद होने से सभी हैरान हैं।
रवींद्र सरोवर स्टेडियम में साउदर्न समिति क्लब भी अभ्यास करता है। क्लब की सभी टीमें, यहां तक कि महिला टीम भी इसी मैदान पर अभ्यास करती है। इस मामले की पुष्टि करते हुए साउदर्न समिति के प्रमुख अधिकारी सौरभ पाल ने कहा कि हां रवींद्र सरोवर स्टेडियम बंद कर दिया गया है। गुरुवार सुबह करीब साढ़े दस बजे यहां ताला लगाया गया। यह कदम सरकार की ओर से उठाया गया है।
क्लबों ने सरकार को पत्र लिखने की बनाई योजना
हालांकि इस फैसले के बाद क्लब चुप बैठने के मूड में नहीं हैं। सौरभ पाल ने आगे कहा कि हम सभी पंजीकृत क्लब, जो नियमित रूप से लीग में हिस्सा लेते हैं, मिलकर सरकार को पत्र लिखेंगे। हम अनुरोध करेंगे कि कम से कम अभ्यास जारी रखने की व्यवस्था पर विचार किया जाए।
सूत्रों के अनुसार सरकार रवींद्र सरोवर स्टेडियम को नए रूप में विकसित करना चाहती है। खास तौर पर राज्य के नए खेल मंत्री निशीथ प्रमाणिक इस ऐतिहासिक मैदान में बड़े बदलाव की योजना बना रहे हैं। एक समय इस स्टेडियम में इंडियन सुपर लीग के मुकाबले भी आयोजित किए गए थे लेकिन अब वहां पहले जैसी रौनक और बड़े मैचों का माहौल नहीं दिखाई देता।
ओलंपिक स्तर का ट्रैक लगाने की तैयारी
सूत्रों का कहना है कि खेल मंत्री निशीथ प्रमाणिक पहले ही रवींद्र सरोवर स्टेडियम को लेकर अपनी योजनाओं का संकेत दे चुके थे। जानकारी मिली है कि यहां ओलंपिक स्तर का एथलेटिक्स ट्रैक लगाने की योजना भी तैयार की जा रही है। यानी भविष्य में इस स्टेडियम को आधुनिक खेल सुविधाओं से लैस करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके साथ ही एक और महत्वपूर्ण वजह भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि स्टेडियम के कई कमरों पर लंबे समय से ऐसे लोगों या संगठनों का कब्जा था, जिनका खेल गतिविधियों से कोई सीधा संबंध नहीं था। माना जा रहा है कि उन कब्जों को हटाकर स्टेडियम को पूरी तरह खेल गतिविधियों के लिए उपयोगी बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
हालांकि इस पूरे मामले पर खेल मंत्री निशीथ प्रमाणिक की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की गई लेकिन अब तक उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।