हावड़ा नगर निगम का चुनाव पिछले लगभग 8 सालों से नहीं हुआ है। इस वजह से दिन-प्रतिदिन नागरिक सेवाओं की स्थिति भी खराब होती जा रही है। हावड़ा नगर निगम की लगभग सभी वार्डों में जल निकासी से लेकर कचरा प्रबंधन तक आदि समस्याएं परेशानी का कारण बन चुकी है।
ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा आश्वासन दिया है। गुरुवार को हावड़ा में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बैठक की। इस बैठक में भाजपा के चारों विधायक भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान ही हावड़ा नगर निगम चुनाव का मुद्दा भी उठाया गया।
बैठक के बाद शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यदि सब कुछ ठीक रहा तो इस वर्ष दिसंबर तक हावड़ा नगर निगम और बाली नगर निगम के चुनाव संपन्न करा लिए जाएंगे। इससे पहले आखिरी बार साल 2013 में हावड़ा नगर निगम का चुनाव करवाया गया था।
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नगर निगम का कार्यकाल वर्ष 2018 में समाप्त हो गया था लेकिन उसके बाद दोबारा चुनाव नहीं करवाए गए। वर्ष 2015 में बाली नगर निगम को समाप्त कर उसे हावड़ा नगर निगम में मिला दिया गया था। हालांकि बाद में फिर से बाली क्षेत्र को हावड़ा नगर निगम क्षेत्र से अलग कर स्वतंत्र नगरपालिका का दर्जा दिया गया।
पूर्व की तृणमूल सरकार ने इस संबंध में एक विधेयक पारित कर उसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा था। हालांकि परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जुड़ी प्रक्रियाओं में लगातार देरी होती रही। इसके कारण हावड़ा नगर निगम चुनाव नहीं हो सके। नतीजन, नगर प्रशासन की स्थिति बदहाल हो गई और आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
नगर निगम चुनाव न होने के कारण सबसे बड़ी समस्या जल निकासी और कचरा प्रबंधन को लेकर पैदा हुई है। पिछले वर्ष बेलघरिया के कचरा डंपिंग ग्राउंड में जमा लगभग 10–15 मंजिल ऊंचे कचरे का ढेर अचानक ढह गया जिससे गंभीर आपदा की स्थिति बन गई। इस घटना के बाद आसपास के कई घरों में दरारें आ गईं थी। नालियों की निकासी व्यवस्था पूरी तरह बाधित हो गई और इलाके में गंभीर जल संकट उत्पन्न हो गया।
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गौरतलब है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने जल्द ही हावड़ा नगर निगम चुनाव कराने का आश्वासन दिया था। पिछले दिनों ही शिवपुर के विधायक रुद्रनील घोष ने हावड़ा नगर निगम के प्रमुख अधिकारियों के साथ बैठक की थी।
इस बैठक में बताया गया कि निकाय कर्मियों और फंड की कमी एक बड़ी समस्या है। हालांकि यह भी बताया गया कि आम नागरिकों की सेवाएं बाधित न हो, इसे सुनिश्चित करने के लिए एक ‘को-ऑर्डिनेशन’ कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी को अगले तीन महीनों में प्राथमिकता वाले कार्यों की सूची तैयार कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।