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केरल के बाद तमिलनाडु में भी, दक्षिण भारतीय दोनों राज्यों में बनेंगे AI मंत्री

तमिलनाडु की नई मंत्रिपरिषद की संख्या 10 से बढ़कर अब 33 हो गयी है। मुख्यमंत्री विजय समेत कुल 32 मंत्रियों ने आज नई जिम्मेदारियां संभाल लीं।

By Moumita Bhattacharya

May 21, 2026 20:36 IST

तकनीक के साथ कदम मिलाते हुए भारत की शासन व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हुई है। पहले केरल ने ऐसा कदम उठाया था और अब उसकी राह पर ही आगे बढ़ते हुए तमिलनाडु में भी Artificial Intelligence (AI) के लिए अलग मंत्रालय का गठन किया है।

गुरुवार को तमिलनाडु में मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया। इसके बाद ही मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय उर्फ विजय थलपति के नेतृत्व में यह निर्णय लिया गया। विस्तार के तहत राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग का दायरा बढ़ाकर उसका नया नाम 'Artificial Intelligence, Information Technology and Digital Services Department' (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड डिजिटल सर्विसेज विभाग) रखा गया है।

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मंत्रिमंडल में नव-निर्वाचित 23 विधायकों को शामिल किया गया है। इसके साथ ही तमिलनाडु की नई मंत्रिपरिषद की संख्या 10 से बढ़कर अब 33 हो गयी है। मुख्यमंत्री विजय समेत कुल 32 मंत्रियों ने आज नई जिम्मेदारियां संभाल लीं।

कांग्रेस के 2 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली है, जबकि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का एक विधायक बाद में शपथ लेगा। नई मंत्रिमंडल में 4 महिला मंत्रियों को भी शामिल किया गया है। हालांकि इस नई सरकार का सबसे बड़ा आकर्षण Artificial Intelligence के लिए अलग मंत्रालय का गठन माना जा रहा है।

इस नवगठित हाई-टेक विभाग की जिम्मेदारी आर. कुमार (R. Kumar) को सौंपी गई है। यह विभाग मुख्य रूप से राज्य में Artificial Intelligence से जुड़ी नीतियों के निर्माण, डिजिटल गवर्नेंस और उन्नत तकनीकों के व्यावसायिक उपयोग पर निगरानी रखेगा।

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इसके ठीक एक दिन पहले एक सरकारी गजट अधिसूचना के जरिए केरल की नई UDF सरकार ने भी भारत में पहली बार AI मंत्रालय बनाए जाने की घोषणा की थी। वरिष्ठ इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेता पी. के. कुनहलीकुट्टी को उद्योग, वाणिज्य, आईटी के साथ-साथ इस नए AI विभाग की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

तकनीकी जानकारों का कहना है कि भारत के राज्यों में यह प्रवृत्ति बेहद सकारात्मक है। उनका कहना है कि Artificial Intelligence को केवल आईटी विभाग के भीतर एक छोटी इकाई के रूप में रखने के बजाय इसके लिए अलग मंत्रालय बनाना भारतीय प्रशासन के डिजिटल परिवर्तन को और तेज करेगा।

विशेषज्ञों के एक समूह का यह भी कहना है कि दक्षिण भारत के ये दो राज्य जिस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं उसे देखते हुए आने वाले समय में देश के अन्य राज्य भी इसी तरह के तकनीक-आधारित प्रशासनिक मॉडल को अपना सकते हैं।

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