हैदराबाद : अमानवीय परिस्थितियों, न्यूनतम वेतन के अभाव और गंभीर शारीरिक-मानसिक उत्पीड़न के आरोपों के बीच मंगलवार रात तेलंगाना राज्य के तेलंगाना में निजामाबाद जिला के आर्मूर क्षेत्र स्थित कई ईट-भट्टों पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 400 ‘बंधुआ मजदूरों’ को मुक्त कराया है। इनमें करीब 100 बच्चे भी शामिल बताए गए हैं।
इन मजदूरों को घुप्प अंधेरे, तंग और असुविधाजनक कमरों में रखा जाता था, जहाँ बिजली, पर्याप्त भोजन और बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। आरोप है कि उन्हें न्यूनतम वेतन भी नहीं दिया जाता था और काम के बदले केवल रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएँ खरीदने के लिए ‘वाउचर’ दिए जाते थे। इसके साथ ही उन पर शारीरिक, मानसिक उत्पीड़न और यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
पुलिस के अनुसार मुक्त कराए गए मजदूर तेलंगाना के साथ-साथ आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और ओडिशा राज्यों से संबंधित हैं। आरोप है कि इन लोगों को वर्षों से विभिन्न ईट-भट्टों में जबरन काम कराया जा रहा था। आर्मूर पुलिस की 30 सदस्यीय विशेष टीम ने मंगलवार रात यह कार्रवाई की। पुलिस निरीक्षक सत्यनारायण ने बताया कि रात 8 बजे तक लगभग 200 मजदूरों की पहचान की जा चुकी थी। उनके अनुसार मुक्त कराए गए मजदूरों में कई महिलाएँ और बच्चे शामिल हैं तथा उनमें से कई कुपोषण के शिकार पाए गए हैं।
आरोपों के अनुसार इन मजदूरों को ‘बंधुआ मजदूर’ के रूप में काम करने के लिए मजबूर किया जाता था और उचित मजदूरी नहीं दी जाती थी। तमिलनाडु के एक मजदूर ने बताया कि वह पिछले चार वर्षों से काम कर रहा है, लेकिन इस दौरान उसे कोई नकद मजदूरी नहीं मिली। इसके बजाय उसे हर सप्ताह केवल 200 रुपये का एक ‘वाउचर’ दिया जाता था। मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि उन पर लगातार शारीरिक और मानसिक अत्याचार किए जाते थे और कुछ मामलों में यौन शोषण भी हुआ।
पुलिस अधिकारी सत्यनारायण ने बताया कि एक मजदूर के रिश्तेदार से मिली सूचना के आधार पर इस कार्रवाई की शुरुआत हुई। प्राप्त सूचना के अनुसार ईट-भट्टों में मजदूरों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा था। इसके बाद पुलिस ने छापेमारी कर मजदूरों को मुक्त कराया। वर्तमान में सभी को एक अस्थायी शिविर में रखा गया है, जहाँ उनके लिए भोजन और पेयजल की व्यवस्था की गई है। पुलिस ने कहा है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है। सभी मुक्त मजदूरों के बयान दर्ज किए जाएंगे और इस अवैध गतिविधि में शामिल लोगों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। साथ ही इन मजदूरों के पुनर्वास की व्यवस्था करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।