रोम : प्रधानमंत्री मोदी के रोम पहुंचने से पहले ही इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ उनकी संयुक्त घोषणा सार्वजनिक हुई। इसमें कहा गया कि भारत और इटली के द्विपक्षीय संबंध एक अत्यंत महत्वपूर्ण दौर में प्रवेश कर चुके हैं। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के रिश्ते केवल मित्रता तक सीमित नहीं रहे बल्कि विशेष रणनीतिक साझेदारी में विकसित हुए हैं।
संयुक्त बयान में उल्लेख किया गया कि वैश्विक परिदृश्य में लगातार बदलाव के बीच भारत और इटली की साझेदारी को राजनीतिक और संस्थागत स्तर पर नियमित संवाद से नई गति मिली है। इसके साथ आर्थिक गतिशीलता, सामाजिक सृजनात्मकता और हजारों वर्षों की सभ्यतागत विरासत भी इस संबंध को मजबूती प्रदान कर रही है। दोनों देशों ने अपनी साझेदारी को समान सोच और साझा दृष्टिकोण का प्रतीक बताया।
घोषणा में यह भी कहा गया कि आज के दौर में किसी देश की समृद्धि और सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि वह नवाचार, ऊर्जा और ईंधन परिवर्तन के क्षेत्रों में कितना सक्षम है तथा रणनीतिक संप्रभुता की रक्षा करने में कितना दक्ष है। इसी कारण भारत और इटली अपने द्विपक्षीय संबंधों को अधिक गहरा और बहुआयामी बनाने के प्रयास में जुटे हैं। उद्देश्य यह है कि दोनों देश अपनी-अपनी क्षमताओं का उपयोग एक-दूसरे के हित में कर सकें।
संयुक्त वक्तव्य में कहा गया कि इटली की विनिर्माण क्षमता, औद्योगिक शक्ति और भारत की तेज आर्थिक वृद्धि तथा समृद्ध नवाचार क्षमता को एक मंच पर लाकर मजबूत समन्वय स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। नई दिल्ली और रोम ने यह लक्ष्य भी सामने रखा कि वर्ष 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 बिलियन यूरो तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए रक्षा, विमानन, हरित प्रौद्योगिकी, मशीनरी, स्वचालन प्रणाली, रसायन, औषधि, वस्त्र, कृषि-खाद्य और पर्यटन जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। संयुक्त बयान में विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि भारत-इटली साझेदारी के केंद्र में तकनीकी नवाचार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।