कोलकाता: ईद-उल-जुहा से पहले पश्चिम बंगाल में गाय की कुर्बानी को लेकर लागू नियमों पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की खंडपीठ ने राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना अनिवार्य फिटनेस प्रमाणपत्र के किसी भी गाय की कुर्बानी की अनुमति नहीं दी जा सकती। साथ ही यह भी कहा गया कि किसी भी खुले या सार्वजनिक स्थान पर गाय की कुर्बानी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस विषय में पहले से ही पर्याप्त कानून मौजूद है और राज्य सरकार को इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करना चाहिए।
राज्य सरकार ने 13 मई 2026 को जारी निर्देशों में तय किया था कि गाय की कुर्बानी के लिए फिटनेस प्रमाणपत्र तभी मिलेगा जब संबंधित नगरपालिका या पंचायत समिति प्रमुख और सरकारी पशु चिकित्साधिकारी यह लिखित रूप से पुष्टि करें कि पशु 14 वर्ष से अधिक आयु का है या फिर वह बीमारी, चोट या अन्य कारणों से काम या प्रजनन के योग्य नहीं है।
सरकारी आदेश के अनुसार गाय की कुर्बानी केवल नगरपालिका द्वारा अधिकृत स्थानों या निर्धारित बूचड़खानों में ही की जा सकेगी। खुले स्थानों पर कुर्बानी की अनुमति नहीं होगी।
कानून का उल्लंघन करने पर छह महीने तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजा का प्रावधान है। वहीं, अगर किसी को फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं मिलता तो वह 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार के पास अपील कर सकता है।