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जापानी औपनिवेशिक दौर में दो युवतियों की प्रेमकथा ने जीता दुनिया का प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान

ताइवानी उपन्यास ‘ताइवान ट्रैवलॉग’ ने जीता इंटरनेशनल बुकर

ताइपेई : जापानी औपनिवेशिक शासन के दौर में ताइवान की खाद्य संस्कृति की तलाश में भटकती दो युवतियों की प्रेमकथा पर आधारित उपन्यास ताइवान ट्रैवलॉग को इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार मिला है। यह ताइवान के इतिहास में इस सम्मान को पाने वाला पहला उपन्यास बन गया है। उपन्यासकार यांग शुआंग जि द्वारा लिखित और ताइवान-अमेरिकी लेखिका लिन किंग द्वारा अंग्रेज़ी में अनूदित इस कृति ने एक नया इतिहास रचा है। यह पहली बार है जब मैंडरिन चीनी भाषा से अंग्रेज़ी में अनूदित किसी उपन्यास को बुकर पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

उपन्यास का केंद्र बीसवीं सदी के तीसरे दशक की पृष्ठभूमि में विकसित दो युवतियों के प्रेम का आख्यान है। कहानी में शासक और उपनिवेशित समाज के बीच मौजूद वर्गीय असमानताओं और सत्ता-संबंधों की जटिलता को भी बारीकी से पिरोया गया है। कथा वर्ष 1938 से शुरू होती है। जापान के नागासाकी की लेखिका आओयामा चिज़ुको सरकारी यात्रा पर ताइवान पहुंचती हैं। लेकिन साम्राज्यवादी सरकारी एजेंडे से उनका मोहभंग हो जाता है और वह ताइवान के औपनिवेशिक दौर के भोजन की खोज में निकल पड़ती हैं।

इस यात्रा में उनका साथ देती है एक रूढ़िवादी ताइवानी परिवार की जीवंत युवती चिज़ुरु। शुरुआत में वह लेखिका की दुभाषिया होती है, लेकिन धीरे-धीरे वह उनकी ‘एक्सपेरिमेंटल कुक’ बन जाती है। भोजन की तलाश के दौरान दोनों के बीच संबंध गहराते जाते हैं। चिज़ुको धीरे-धीरे चिज़ुरु के प्रति आकर्षित होने लगती हैं और उसे अपने पुराने रिश्ते से बाहर आने की सलाह भी देती हैं। आरंभ में दुविधा में रहने वाली चिज़ुरु उनसे दूरी बनाए रखती है, लेकिन समय के साथ दोनों का रिश्ता आत्मीय और मधुर हो उठता है।

पाठकों का मानना है कि यह काल्पनिक उपन्यास अपने पात्रों और औपनिवेशिक परिवेश को इतनी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है कि इसे पढ़ते समय यह किसी वास्तविक ऐतिहासिक घटना का दस्तावेज प्रतीत होने लगता है।

19 मई को लंदन में आयोजित समारोह में पुरस्कार की घोषणा करते हुए निर्णायक मंडल की सदस्य नताशा ब्राउन ने कहा कि ताइवान ट्रैवलॉग ने दो स्तरों पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। यह एक ओर प्रेमकथा प्रस्तुत करता है, वहीं दूसरी ओर उत्तर-औपनिवेशिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय को भी सामने लाता है।

आयोजकों के अनुसार 50,000 यूरो की पुरस्कार राशि लेखक और अनुवादक के बीच समान रूप से बांटी जाएगी। इससे पहले वर्ष 2021 में यह उपन्यास ताइवान का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ‘द गोल्डन ट्राइपॉड अवॉर्ड’ भी जीत चुका है।

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