टेगुसिगाल्पा : होंडुरास में अलग-अलग स्थानों पर हुई अंधाधुंध गोलीबारी की घटनाओं ने पूरे देश को दहला दिया है। इन हमलों में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई है। मृतकों में कई पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार दो अलग-अलग इलाकों में हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाई जिसके बाद भारी जनहानि हुई।
मारे गए लोगों में पुलिस के डिप्टी कमिश्नर लेस्टर अमाडोर का नाम भी शामिल है। पुलिस के अनुसार वह एक अभियान के सिलसिले में अपनी टीम के साथ यात्रा कर रहे थे। राजधानी टेगुसिगाल्पा से ओमोआ जाते समय उन पर हमला किया गया। इस हमले में छह पुलिस अधिकारियों सहित कई लोगों की जान चली गई। पब्लिक प्रॉसिक्यूटर कार्यालय के प्रवक्ता यूरी मोरा ने बताया कि पहला हमला गुरुवार को उत्तरी होंडुरास के त्रूजिलो नगर पालिका के रिगोरेस इलाके में स्थित एक पाम वृक्ष फार्म पर हुआ। वहां कम से कम 19 मजदूरों को गोलियों से भून दिया गया।
पुलिस के मुताबिक दूसरी गोलीबारी ग्वाटेमाला सीमा के पास उत्तरी होंडुरास के कोर्टेस विभाग में हुई। राष्ट्रीय पुलिस के प्रवक्ता एडगार्दो बाराहोना ने कहा कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमले के पीछे कौन लोग थे और उनका उद्देश्य क्या था।
स्थानीय समाचार माध्यमों के अनुसार, हथियारबंद हमलावरों ने खेत मजदूरों पर अंधाधुंध फायरिंग की। पीड़ितों में वे लोग भी शामिल थे जो एक स्थानीय चर्च में एकत्र हुए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हमलावरों ने बिना किसी चेतावनी के गोलियां चलानी शुरू कर दीं, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
होंडुरास की सशस्त्र सेना के संयुक्त स्टाफ प्रमुख हेक्टर बेंजामिन वैलेरियो आर्डोन ने बयान जारी कर कहा कि हमले के जिम्मेदार लोगों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए सेना ने व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। पुलिस को आशंका है कि कुछ संदिग्ध हमलावर मारे गए या घायल हुए हो सकते हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा इलाका लंबे समय से हिंसक संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। आरोप है कि उपजाऊ जमीनों पर कब्जा जमाने के लिए सशस्त्र गिरोह स्थानीय किसानों और मजदूरों को जबरन बेदखल कर रहे हैं। इसी वजह से वहां समय-समय पर घातक हमले होते रहे हैं।
इस मुद्दे पर पहले भी अंतर-अमेरिकी मानवाधिकार आयोग चेतावनी दे चुका है। आयोग ने कहा था कि भूमि और संसाधनों पर नियंत्रण को लेकर क्षेत्र में हिंसा लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2024 में पांच पर्यावरण कार्यकर्ताओं की हत्या हुई थी जबकि उससे पिछले वर्ष 18 पर्यावरणविदों की जान गई थी। इन घटनाओं के बाद मानवाधिकार संगठनों ने हालात को लेकर गंभीर चिंता जताई थी।