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अग्निमित्रा पॉल ने हुमायूं कबीर को चेताया, आखिर क्यूं कहा- 'बंगाल के नियम मानें या दूसरे देश चले जाएं' ?

पश्चिम बंगाल सरकार के नए नियमों के बाद पशु वध को लेकर सियासी विवाद तेज।

By श्वेता सिंह

May 22, 2026 14:09 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल में पशु वध के नियंत्रण से जुड़े सरकारी नियमों को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। राज्य सरकार के नए नोटिफिकेशन के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर राज्य की मंत्री अग्निमित्र पॉल ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार के फैसले का समर्थन किया है और विपक्षी नेता हमायूं कबीर पर तीखा पलटवार किया है।

पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार द्वारा पशु वध को लेकर लागू किये गये नियमों पर हुमायूं कबीर ने गुरुवार को विवादित बयान दिया था। अब शुभेंदु सरकार में मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने हुमायूं कबीर से कहा है कि अगर वो नियम नहीं मानना चाहते हैं तो दुनिया के किसी भी इस्लामिक मुल्क में जा सकते हैं।

अग्निमित्र पॉल ने कहा कि मवेशी वध से जुड़े नियम कोई नए नहीं हैं, बल्कि यह कानून वर्ष 1950 से लागू है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने वोट बैंक की राजनीति के चलते इस कानून को ठीक से लागू नहीं किया।

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, अग्निमित्रा पॉल ने हमायूं कबीर के उस बयान पर भी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने कुर्बानी की परंपरा को जारी रखने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि पशु वध के ये नियम पहले से हैं लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि शुभेंदु सरकार ने इसे कड़ाई से लागू किया है। हुमायूं कबीर के बयान के सवाल पर उन्होंने कहा,मिस्टर हुमायूं कबीर अगर तुम बंगाल में रहना चाहते हो तो तुम्हें बंगाल के नियम मानने होंगे। अगर तुम्हें लगता है कि तुम राज्य के नियमों का पालन नहीं कर सकते तो तुम उस राज्य में जा सकते हो जहां तुम्हें जाने की इजाजत हो। ”

अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि अगर हुमायूं कबीर को किसी राज्य में जाने की इजाजत नहीं मिलती है तो वह देश के बाहर जा सकते हैं। दुनिया में 55-56 इस्लामिक मुल्क हैं, हुमायूं कबीर वहां जा सकते हैं। अगर हुमायूं कबीर को भारत में रहना है तो भारतीय की तरह बर्ताव करना पड़ेगा। उन्हें संविधान और बीएनएस के नियमों को पालन करना पड़ेगा।

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नए नोटिफिकेशन में क्या है प्रावधान ?

राज्य सरकार ने पश्चिम बंगाल एनिमल स्लॉटर कंट्रोल एक्ट, 1950 के तहत नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके अनुसार अब किसी भी पशु के वध के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा।

यह प्रमाणपत्र नगरपालिका के अध्यक्ष या पंचायत समिति के प्रमुख और सरकारी पशु चिकित्सक द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया जाएगा। तभी इसे मान्य माना जाएगा जब दोनों इस बात पर सहमत हों कि पशु 14 वर्ष से अधिक आयु का है, काम या प्रजनन के लिए अयोग्य है या बीमारी/चोट के कारण स्थायी रूप से असमर्थ है।

सार्वजनिक स्थानों पर वध पर रोक

नए नियमों के तहत अब किसी भी पशु का वध सार्वजनिक स्थानों पर नहीं किया जा सकेगा। केवल नगरपालिका द्वारा अधिकृत स्लॉटरहाउस या स्थानीय प्रशासन द्वारा तय स्थानों पर ही वध की अनुमति होगी।

नियमों का उल्लंघन करने पर अधिकतम छह महीने की जेल, 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजा का प्रावधान रखा गया है।

मामला अदालत तक पहुंचा

सरकारी आदेश के खिलाफ कई याचिकाएं कलकत्ता हाई कोर्ट में दाखिल की गई थीं। हालांकि अदालत ने इस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी खुले सार्वजनिक स्थान पर मवेशी या भैंस का वध प्रतिबंधित है। अदालत ने यह भी कहा कि ईद-उल-जुहा के लिए गाय की कुर्बानी कोई अनिवार्य धार्मिक परंपरा नहीं है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट में भी माना गया है।

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अदालत का निर्देश

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था और अधिकारी मौजूद हैं या नहीं। साथ ही यह देखा जाए कि पूरे राज्य में जरूरी ढांचा ठीक से काम कर रहा है या नहीं। अदालत ने उम्मीद जताई कि सरकार इन व्यवस्थागत कमियों को जल्द दूर करेगी और नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करेगी।

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