नई दिल्ली : केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा है कि भारत जब 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है, तब केंद्र सरकार योगासन को पहली बार ओलंपिक खेल के रूप में स्थापित करने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।
मनसुख मांडविया ने यह बात राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कही, जहां 4 से 8 जून तक होने वाली पहली विश्व योगासन चैंपियनशिप की शुरुआत की घोषणा की गई। यह पहली बार है जब इस वैश्विक प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। चैंपियनशिप में 75 देशों के 500 से अधिक प्रतिभागियों के हिस्सा लेने की उम्मीद है। अहमदाबाद इस प्रतियोगिता की मेजबानी करेगा और इसमें 12 अलग-अलग स्पर्धाएं आयोजित होंगी।
केंद्रीय खेल मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भारत की 2036 ओलंपिक मेजबानी की दावेदारी को ध्यान में रखते हुए मनसुख मांडविया ने कहा, “जिस देश ने दुनिया को योग दिया, वही देश 2036 ओलंपिक की मेजबानी की तैयारी कर रहा है। ऐसे में हम योगासन को पहली बार विश्व मंच पर ओलंपिक खेल के रूप में स्थापित करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।”
चैंपियनशिप से पहले उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए खेल मंत्री ने कहा, “योग भारत की ओर से पूरी दुनिया को दिया गया उपहार है। यह पांच हजार वर्ष पहले हमारे देश में खोजा गया एक अनमोल खजाना है।”
योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि योग हमें शरीर और मन दोनों की शक्ति देता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि योग अब केवल अच्छे स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह दुनिया भर में स्वीकार किया जाने वाला एक खेल बनता जा रहा है।
योग की बढ़ती वैश्विक लोकप्रियता पर बात करते हुए मनसुख मांडविया ने कहा, “दुनिया के लगभग सभी देशों ने योग को अपनाना शुरू कर दिया है और इसे अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है।”
उन्होंने कहा कि भारत की योग परंपरा और ज्ञान देश के हर घर और हर गली में मौजूद है।
योग के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करते हुए खेल मंत्री ने कहा, “योगासन आज केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का माध्यम नहीं है, बल्कि यह रोजगार का भी एक बड़ा स्रोत बन रहा है और दुनिया भर में भारत की सॉफ्ट पावर का मजबूत प्रतीक बन चुका है।”
उन्होंने कहा कि यह चैंपियनशिप भारत के लिए वैश्विक स्तर पर अपनी सांस्कृतिक और सॉफ्ट पावर को प्रदर्शित करने का बड़ा अवसर है।
कार्यक्रम के दौरान चैंपियनशिप का आधिकारिक लोगो, ट्रॉफी, जर्सी और ‘वीर द लायन’ शुभंकर भी लॉन्च किया गया। इन सभी प्रतीकों के माध्यम से योगासन को भारत की प्राचीन विरासत से जुड़ा आधुनिक वैश्विक खेल के रूप में प्रस्तुत किया गया। चैंपियनशिप की पहचान में खेल उत्कृष्टता, वैश्विक एकता, युवाओं की आकांक्षाएं और स्वास्थ्य व खेल के क्षेत्र में भारत की नेतृत्व क्षमता को दर्शाया गया है। इसे भारत की सांस्कृतिक विरासत और विकसित भारत की अवधारणा का संगम बताया गया।
विश्व योगासन चैंपियनशिप 2026 को युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, आयुष मंत्रालय, भारतीय खेल प्राधिकरण, गुजरात खेल प्राधिकरण, गुजरात पर्यटन और गुजरात योगासन स्पोर्ट्स एसोसिएशन का समर्थन प्राप्त है। इसे योगासन को वैश्विक खेल मंच पर स्थापित करने की दिशा में राष्ट्रीय स्तर का साझा प्रयास माना जा रहा है।
इस प्रतियोगिता में पारंपरिक योगासन, आर्टिस्टिक योगासन, रिदमिक पेयर्स और टीम इवेंट्स जैसी कई प्रतिस्पर्धात्मक श्रेणियां शामिल होंगी। खिलाड़ी जूनियर, यूथ और एलीट वर्गों में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नियमों और जजिंग प्रणाली के तहत प्रतिस्पर्धा करेंगे।
विश्व योगासन चैंपियनशिप को योगासन की उस दीर्घकालिक योजना में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसका लक्ष्य भविष्य में इसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बहु-खेल आयोजनों में शामिल कराना और अंततः ओलंपिक मान्यता दिलाना है।