नई दिल्लीः नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में गिरफ्तार शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर की पुलिस हिरासत दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार को एक दिन के लिए और बढ़ा दी। अब उन्हें बुधवार को फिर अदालत में पेश किया जाएगा। विशेष सीबीआई न्यायाधीश अजय गुप्ता ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया। इससे पहले उनकी पूर्व पुलिस हिरासत अवधि समाप्त होने पर उन्हें अदालत में पेश किया गया था।
सीबीआई ने अदालत से कहा कि मामले में आमने-सामने पूछताछ और कुछ बरामदगी अभी बाकी है, इसलिए अतिरिक्त हिरासत की जरूरत है। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश लोक अभियोजक नीतू सिंह ने अदालत को बताया कि शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर का संपर्क प्रह्लाद कुलकर्णी से सीधे तौर पर था और इसी कड़ी में आगे की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसी के अनुसार महाराष्ट्र के लातूर में आरसीसी इंस्टीट्यूट ऑफ कोचिंग चलाने वाले शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को पुणे से गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि वे नीट-यूजी 2026 परीक्षा से पहले रसायन विज्ञान का प्रश्नपत्र लीक करने की साजिश में सक्रिय रूप से शामिल थे। सीबीआई का दावा है कि उन्होंने परीक्षा से पहले छात्रों तक लीक प्रश्नपत्र पहुंचाया।
अदालत ने 18 मई को उन्हें नौ दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा था। उस समय अदालत ने कहा था कि सह-अभियुक्तों की पहचान और गिरफ्तारी, डिजिटल उपकरणों व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच, संचार रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल के लिए हिरासत आवश्यक है। अदालत ने यह भी माना था कि जांच शुरुआती और बेहद महत्वपूर्ण चरण में है। मेडिकल परीक्षण की शर्त पर नौ दिन की हिरासत मंजूर की गई थी।
जांच अधिकारी उप पुलिस अधीक्षक पवन कुमार कौशिक ने ट्रांजिट रिमांड खत्म होने के बाद मोटेगांवकर को अदालत में पेश किया था। सीबीआई का आरोप है कि वे अन्य अभियुक्तों के साथ मिलकर प्रश्नपत्र लीक करने और उसे वितरित करने की साजिश में शामिल थे। एजेंसी ने अदालत को बताया कि अभियुक्त के मोबाइल फोन से लीक प्रश्नपत्र बरामद हुआ है।
सीबीआई के मुताबिक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को 23 अप्रैल 2026 को ही नीट 2026 के रसायन विज्ञान के प्रश्न और उत्तर प्राप्त हो गए थे, जबकि परीक्षा निर्धारित तिथि से बाद में होनी थी। जांच एजेंसी ने कहा कि उनके मोबाइल फोन में वही लीक प्रश्नपत्र मिला, जिसे उन्होंने कई लोगों तक पहुंचाया। जांच अधिकारी ने अदालत को यह भी बताया कि एक वीडियो मिला है, जिसमें मोटेगांवकर छात्रों से यह कहते दिखाई दे रहे हैं कि उन्होंने जो प्रश्न दिए थे, वही असली परीक्षा में आए।
अभियुक्त पक्ष के वकील ने 10 दिन की हिरासत का विरोध किया था। इसके बावजूद सीबीआई ने कहा कि पूछताछ के लिए अभियुक्त को देश के अलग-अलग हिस्सों में ले जाना जरूरी हो सकता है। एजेंसी ने अदालत को बताया कि हिरासत इसलिए भी आवश्यक है ताकि इसी तरह के अन्य पेपर लीक अपराधों को रोका जा सके, बाकी अभियुक्तों को पकड़ा जा सके और डिजिटल व वित्तीय साक्ष्यों की गहन जांच की जा सके।
अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि इस मामले में अभियुक्त एक संगठित पेपर लीक गिरोह का हिस्सा प्रतीत होते हैं और सभी ने प्रश्नपत्र लीक करने तथा उसे फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाई। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि राजस्थान एसओजी की तथ्य जांच में सामने आया था कि 3 मई 2026 को आयोजित वास्तविक परीक्षा में पूछे गए कई प्रश्न पहले ही लीक होकर प्रसारित किए जा चुके थे।