नई दिल्ली : बचपन में तिरुपुर के स्कूल में पढ़ते समय मेरे मन में देश को लेकर अनेक सपने थे। मैं सोचता था कि भारत कब अपना गौरव वापस पाएगा? कब यह विश्व मंच पर एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में उभरेगा? आज मेरे वे सपने साकार हो रहे हैं। स्वामी विवेकानंद का यह कथन मुझे बार-बार स्मरण होता है—“उठो, जागो, लक्ष्य प्राप्त होने तक रुको मत।”
देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। वैश्विक आर्थिक मंदी और अनिश्चितता के बीच भी हम मजबूत हो रहे हैं। एक कमजोर अर्थव्यवस्था से निकलकर हम अब विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके हैं। पिछले एक दशक में लगभग 25 करोड़ भारतीय गरीबी से बाहर निकलकर सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत प्रति वर्ष 80 करोड़ लोगों को 5 किलोग्राम मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। आयुष्मान भारत योजना के तहत अब 44 करोड़ से अधिक लोग 5 लाख रुपये तक के बीमा सुरक्षा कवच के अंतर्गत आ चुके हैं।
किसानों ने भारत को विश्व का दूसरा सबसे बड़ा खाद्य उत्पादक देश बना दिया है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत अब तक 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा चुकी है। 3 करोड़ से अधिक महिलाएँ “लखपति दीदी” और “नमो ड्रोन दीदी” के रूप में पहचान बना चुकी हैं। कृषि, शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, रक्षा या अंतरिक्ष तकनीक—हर क्षेत्र में महिलाएँ आगे बढ़ रही हैं।
युवाओं के लिए पिछले 10 वर्षों में 13 नए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) स्थापित किए गए हैं। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) की संख्या 13 से बढ़कर 21 हो गई है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की संख्या 7 से बढ़कर लगभग 23 हो गई है। मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 823 हो गई है। चिकित्सा शिक्षा में सीटों की संख्या 51,348 से बढ़कर 1,29,603 हो गई है।
देश के रेलमार्गों का लगभग 99 प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका है। 64 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की शुरुआत की गई है। हवाई अड्डों की संख्या भी 74 से बढ़कर 163 हो गई है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को पूर्व-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं से बड़ा लाभ मिला है। प्रधानमंत्री उत्तर-पूर्वी राज्यों को देश का “अष्टलक्ष्मी” कहते हैं। हाल ही में मैंने नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और सिक्किम का दौरा किया। उस दौरान इन राज्यों के परिवहन और बुनियादी ढांचे में व्यापक सुधार देखा।
कोविड-19 महामारी के समय भारत ने टीका निर्माण में नेतृत्व किया। चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण के साथ भारत उन्नत अंतरिक्ष अन्वेषण के युग में प्रवेश कर चुका है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ भारत को अपने केंद्र के रूप में चुन रही हैं, जिससे निवेश में कई गुना वृद्धि हुई है। आतंकवाद के विरुद्ध मजबूत नीतियों को लागू करने और कानून के शासन को सुदृढ़ करने से देश में अब शांति स्थापित हो रही है।