नई दिल्लीः नई दिल्ली के प्रतिष्ठित दिल्ली जिमखाना क्लब को लेकर केंद्र सरकार और क्लब प्रबंधन के बीच विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। इसी बीच क्लब की पूर्व बोर्ड सदस्य नीजी सप्रा ने क्लब को बचाने की अपील करते हुए कहा है कि सरकार की मंशा पर बिना वजह संदेह नहीं किया जाना चाहिए।
पूर्व बोर्ड सदस्य ने जताई चिंता
नीजी सप्रा ने कहा कि क्लब से उनका गहरा जुड़ाव रहा है और वह भविष्य में भी इससे जुड़ी रहना चाहती हैं। वह 2014 से 2017 तक दिल्ली जिमखाना क्लब की बोर्ड सदस्य और संचालन समिति का हिस्सा रह चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहतीं कि क्लब को खाली कराया जाए या कहीं और स्थानांतरित किया जाए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार के पास सुरक्षा से जुड़े ऐसे कारण हैं जिन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, तो उन पर तुरंत सवाल उठाना सही नहीं होगा।
सप्रा ने क्लब सदस्यों से अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखने और कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की अपील की। उनका कहना था कि एक सदस्य के तौर पर वह चाहती हैं कि क्लब हर हाल में सुरक्षित रहे।
केंद्र सरकार ने क्लब परिसर खाली करने को कहा
विवाद की शुरुआत 22 मई को केंद्र सरकार द्वारा जारी एक पत्र से हुई थी। इस पत्र में दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून तक परिसर का शांतिपूर्ण कब्जा सरकार को सौंपने के लिए कहा गया था।
सरकार ने इसके लिए 1928 में हुए स्थायी लीज समझौते की धारा 4 का हवाला दिया है। इस प्रावधान के तहत यदि परिसर “सार्वजनिक उद्देश्य” के लिए जरूरी हो, तो लीज देने वाला पक्ष दोबारा कब्जा ले सकता है।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला
केंद्र के इस फैसले को चुनौती देते हुए क्लब के कुछ सदस्यों, स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन और अन्य पक्षों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं।
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और क्लब प्रबंधन को समन जारी किया।
सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में स्पष्ट किया कि 22 मई को जारी पत्र तत्काल बेदखली का आदेश नहीं था। उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल स्थायी लीज समाप्त कर परिसर पर दोबारा अधिकार जताया है।
उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया कि यदि भविष्य में बेदखली की कार्रवाई की जाती है, तो वह पूरी तरह कानून और तय प्रक्रिया के अनुसार होगी तथा पहले नोटिस दिया जाएगा।
हाईकोर्ट ने फिलहाल नहीं दिया अंतरिम संरक्षण
केंद्र सरकार के आश्वासन के बाद हाईकोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि जब तक सरकार कानून के अनुसार और नोटिस देकर कार्रवाई करने की बात कह रही है, तब तक तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। अब इस मामले में अदालत की आगे की सुनवाई और केंद्र सरकार की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। दिल्ली के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित क्लबों में शामिल जिमखाना क्लब का भविष्य फिलहाल कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करता दिख रहा है।