नयी दिल्लीः केंद्र सरकार ने देश में जनसंख्या संतुलन और उसमें हो रहे बदलावों पर गहराई से अध्ययन करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति का उद्देश्य अवैध घुसपैठ से जुड़े प्रभावों का विश्लेषण करना और सामाजिक व क्षेत्रीय स्तर पर हो रहे परिवर्तनों को समझना बताया गया है।
चुनावी बहस से नीति निर्माण तक पहुंचा मुद्दा
हाल के चुनावों के दौरान खासकर पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ का मुद्दा प्रमुखता से उठा था। केंद्र सरकार का कहना है कि इस तरह के प्रवासन से कई क्षेत्रों में जनसंख्या का संतुलन प्रभावित हो रहा है, जिससे सामाजिक और सुरक्षा से जुड़े सवाल भी खड़े हो रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र ने इस विषय पर व्यवस्थित अध्ययन और रिपोर्ट तैयार करने का निर्णय लिया है।
प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद शुरू हुई प्रक्रिया
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जानकारी दी कि यह समिति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस भाषण में की गई घोषणा के अनुरूप गठित की गई है। उस भाषण में इस तरह के अध्ययन के लिए एक विशेषज्ञ समूह बनाने की बात कही गई थी। अब उसी दिशा में आगे बढ़ते हुए सरकार ने “हाई-लेवल कमिटी ऑन चेंजिंग पॉपुलेशन पैटर्न” का गठन किया है।
समिति की संरचना और जिम्मेदारियां
इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रकाश प्रभाकर नालवेकड़ को सौंपी गई है। समिति में अनुभवी प्रशासनिक और विशेषज्ञ अधिकारियों को शामिल किया गया है—
-भारत के जनगणना आयुक्त
-सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दुर्गाशंकर मिश्रा
-सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव
-डॉ. शमिका रवि
इसके अलावा गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (विदेशी नागरिक-1) को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है।
किन मुद्दों पर होगा अध्ययन ?
सरकार के अनुसार, यह समिति देश में हो रहे जनसंख्या बदलाव के पैटर्न का विस्तृत अध्ययन करेगी। इसमें यह देखा जाएगा कि अवैध प्रवासन के कारण विभिन्न समुदायों और क्षेत्रों में क्या बदलाव आ रहे हैं और इसका सामाजिक संतुलन पर क्या असर पड़ रहा है।
समिति को यह भी जिम्मेदारी दी गई है कि वह तय समय में अपनी रिपोर्ट और सुझाव केंद्र सरकार को सौंपे।
राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन पर फोकस
केंद्र सरकार का मानना है कि यह मुद्दा केवल जनसंख्या का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिरता से भी जुड़ा हुआ है। साथ ही इसका असर जनजातीय समुदायों और स्थानीय सामाजिक ढांचे पर भी पड़ सकता है।
इसी कारण इस विषय पर एक विस्तृत और निष्पक्ष अध्ययन की जरूरत बताई गई है।
नई समिति से उम्मीद की जा रही है कि वह देश में हो रहे जनसंख्या बदलावों की वास्तविक तस्वीर सामने लाएगी। इसके आधार पर सरकार भविष्य में नीतिगत फैसले ले सकेगी, ताकि सामाजिक संतुलन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।