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सौरव गांगुली ने बंगाल टी-20 लीग को बताया युवा खिलाड़ियों के लिए बड़ा मंच

टी-20 क्रिकेट में गेंदबाजों को ज्यादा स्किलफुल होने की जरूरत, बड़े मैदानों में खेलने की आदत डालने के लिए ईडन गार्डन्स में होंगे मैच।

कोलकाता : आईपीएल खत्म होते ही 5 जून से बंगाल टी-20 लीग की शुरुआत होने जा रही है। टी-20 क्रिकेट के तेजी से बदलते स्वरूप, बंगाल क्रिकेट की स्थिति, आईपीएल में नए सितारों के उभार और भारतीय क्रिकेट के भविष्य को लेकर क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (सीएबी) के अध्यक्ष सौरव गांगुली ने खुलकर अपनी राय रखी। एक खास बातचीत में उन्होंने बताया कि कैसे टी-20 क्रिकेट पूरी तरह बदल चुका है और क्यों वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ियों को तुरंत भारतीय टीम में मौका मिलना चाहिए।

भीषण गर्मी के बीच जून महीने में बंगाल टी-20 लीग कराने पर सवाल उठने पर सौरव गांगुली ने कहा कि दर्शकों की संख्या कम रहने की संभावना जरूर है, लेकिन यह बीसीसीआई की तय की हुई विंडो है।

उन्होंने कहा कि इस गर्मी में दर्शकों के कम आने की संभावना है, लेकिन यह बीसीसीआई की विंडो है। बोर्ड के निर्देश के अनुसार जून से सितंबर के बीच ही यह लीग करानी होगी। मुंबई, बेंगलुरु, सौराष्ट्र और विदर्भ में भी इसी समय लीग आयोजित की जाएगी। दिसंबर या किसी और समय इसे कराना संभव नहीं है, क्योंकि वह घरेलू क्रिकेट का पीक सीजन होता है।

बंगाल टी-20 लीग के उद्देश्य पर सौरव गांगुली ने कहा कि यह प्रतियोगिता बंगाल के खिलाड़ियों के लिए बड़ा मंच साबित होगी।यह लीग बंगाल के खिलाड़ियों को शानदार टी-20 एक्सपोजर देने के लिए बनाई गई है। बचपन से देखता आया हूं कि बंगाल का क्रिकेट हमेशा मैदान केंद्रित रहा है। छोटे मैदानों में छक्का लगाना आसान होता है। लेकिन जब यही खिलाड़ी आईपीएल में ईडन गार्डन्स, वानखेड़े या चेपॉक जैसे बड़े मैदानों में खेलने जाते हैं, तब उन्हें परेशानी होती है। इसलिए हमने मैच ईडन गार्डन्स में रखने का फैसला किया, ताकि खिलाड़ियों में बड़े शॉट खेलने की आदत विकसित हो।

हाल ही में सुनील गावस्कर ने कहा था कि टी-20 क्रिकेट में गेंदबाजों के लिए बहुत कम अवसर बचे हैं और नियमों में बदलाव होना चाहिए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सौरव गांगुली ने कहा कि आज के दौर में गेंदबाजों को और ज्यादा कुशल होना पड़ेगा।

उन्होंने कहा, “टी-20 क्रिकेट में अब गेंदबाज को ज्यादा स्किलफुल होना पड़ेगा। जसप्रीत बुमराह के पास भी एक ही बाउंसर है, लेकिन उन्हें नई गेंद दें, मिडिल ओवर्स में लाएं या डेथ ओवर में, वह विकेट निकालकर ही देंगे। पैट कमिंस, कागिसो रबाडा और लुंगी एनगिडी जैसे विश्वस्तरीय गेंदबाज आज भी विकेट ले रहे हैं। एनगिडी की स्लोअर गेंद एक विशेष कला है। सपाट पिच पर भी उन्होंने ओवर में छह रन से कम दिए, जो अविश्वसनीय है। भुवनेश्वर कुमार को देखिए, वह अब भी लगातार विकेट ले रहे हैं। वसीम अकरम और वकार यूनिस ने भी अपने करियर में ज्यादातर समय फ्लैट विकेटों पर गेंदबाजी की थी, फिर भी वे सफल रहे।”

अगर उन्हें आज के टी-20 दौर में चार ओवर गेंदबाजी करनी पड़ती, तो कैसे तैयारी करते? इस सवाल पर गांगुली ने कहा, “कोई विकल्प नहीं होता। मुझे अपनी गेंदबाजी में काफी सुधार करना पड़ता, ताकि हर गेंद पर मार न खानी पड़े।”

स्पिन गेंदबाजी के कमजोर पड़ने पर उन्होंने कहा कि टी-20 फॉर्मेट लगभग पूरी तरह बल्लेबाजों के पक्ष में चला गया है। मुथैया मुरलीधरन सही कह रहे हैं। 2008 में जब मैंने आईपीएल खेलना शुरू किया था, तब 170-180 रन जीत का स्कोर माना जाता था। कभी-कभार ही 200 रन बनते थे। अब टीमें 265 रन का लक्ष्य भी हासिल कर रही हैं। 250 रन का पीछा करना अब सामान्य हो गया है। खेल पूरी तरह बदल चुका है।

टी-20 क्रिकेट में आए बदलाव को समझाते हुए गांगुली ने कहा कि पहले जहां सिंगल लेना अहम माना जाता था, अब बल्लेबाज शुरुआत से ही बड़े शॉट लगाने की सोचते हैं।जब मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया था, तब कोच कहते थे पहले सिंगल लो। अब कोच कहते हैं कि छक्के लगाओ। अभिषेक शर्मा को देखिए, वह पहली गेंद से ही छक्का मारने की कोशिश करते हैं। वैभव सूर्यवंशी को देखिए, शुरुआत से ही अविश्वसनीय हिटिंग कर रहा है। वनडे क्रिकेट भी पूरी तरह बदल चुका है। 1996 में जब मैंने भारत के लिए नियमित वनडे खेलना शुरू किया था, तब 240-250 रन बहुत अच्छा स्कोर माना जाता था। 2002 में हमने लॉर्ड्स में नेटवेस्ट ट्रॉफी फाइनल में 325 रन का पीछा किया था। 2010 तक आते-आते 350 रन सामान्य स्कोर बन गया था। यही जीवन का नियम है।

बिहार जैसे पड़ोसी राज्य से वैभव सूर्यवंशी जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी सामने आने और बंगाल से बड़े सितारों की कमी पर सौरव गांगुली ने कहा कि बंगाल से इस समय पांच खिलाड़ी आईपीएल में हैं और उनमें से तीन भारतीय टीम के गेंदबाज हैं।इन पांच खिलाड़ियों में तीन भारतीय गेंदबाज हैं, इसे भी देखना चाहिए।हालांकि उन्होंने यह भी माना कि बंगाल से भारतीय टीम में लंबे समय तक खेलने वाले खिलाड़ियों की संख्या कम रही है।

उन्होंने कहा, “मैं मानता हूं कि बंगाल से भारतीय टीम में लंबे समय तक प्रतिनिधित्व की जरूरत है। यही कारण है कि यह लीग शुरू की गई है, ताकि खिलाड़ी खुद को साबित कर सकें। हमारे पास प्रतिभा की कमी नहीं है। मुझे उम्मीद है कि इस लीग के हर मैच में आईपीएल टीमों के स्काउट मौजूद रहेंगे। बृजेश शर्मा को देखिए। वह यहां क्लब क्रिकेट खेलते थे। पिछले साल बंगाल लीग में उनकी गेंदबाजी देखकर राजस्थान ने उन्हें चुना और इस बार वह आईपीएल में राजस्थान टीम के नियमित सदस्य बने।”

वैभव सूर्यवंशी को लेकर सौरव गांगुली ने बेहद बड़ा बयान दिया। जब उनसे पूछा गया कि अगर वह अभी चयनकर्ता होते तो क्या वैभव को भारतीय टीम में जगह देते, तो उन्होंने बिना झिझक कहा, “बिल्कुल वैभव एक असाधारण प्रतिभा है। इस फॉर्मेट में मैं उसे सीधे टीम में शामिल कर लेता। एक तरफ अभिषेक शर्मा और दूसरी तरफ वैभव सूर्यवंशी। उसके बाद संजू सैमसन, ईशान किशन और फिर सूर्यकुमार यादव। साफ तौर पर कहूं तो इस खिलाड़ी को अभी चुन लेना चाहिए।”

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