उत्तर बंगः पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय नई हलचल पैदा हो गई जब उत्तर बंगाल विकास विभाग की प्रशासनिक बैठक में तृणमूल कांग्रेस के 13 विधायक शामिल होते नजर आए। यह बैठक सिलीगुड़ी के पास फूलबाड़ी स्थित उत्तरकन्या में आयोजित की गई थी। इससे पहले नदिया में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक बैठक में तृणमूल सांसदों और विधायकों की मौजूदगी को लेकर भी राजनीतिक बहस छिड़ी थी।
उत्तर बंगाल के 14 में से 13 TMC विधायक रहे मौजूद
उत्तर बंगाल में कुल 54 विधायक हैं, जिनमें तृणमूल कांग्रेस के 14 विधायक शामिल हैं। इनमें से 13 विधायक इस प्रशासनिक बैठक में उपस्थित रहे।
बैठक में तृणमूल सरकार के समय उत्तर बंगाल विकास विभाग की राज्य मंत्री रहीं साबिना यासमीन भी शामिल हुईं। इसके अलावा कन्हैयालाल अग्रवाल, हमीदुर रहमान, बिप्लब मित्र, तोराफ हुसैन मंडल, अब्दुर रहमान बक्सी, समर मुखोपाध्याय, मतिबुर रहमान, प्रसून बंद्योपाध्याय, नजरुल इस्लाम, गोलाम रब्बानी, मिनाजुल आरफिन आजाद और मोशारफ हुसैन भी मौजूद थे।
कांग्रेस के दो विधायक भी बैठक में शामिल हुए।
‘यह राजनीतिक नहीं, प्रशासनिक बैठक थी’
बैठक में शामिल होने को लेकर सवाल उठने पर साबिना यासमीन ने कहा कि यह प्रशासनिक बैठक थी और सभी को आमंत्रित किया गया था। इसलिए इसमें शामिल होने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
उत्तर बंगाल विकास मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने भी कहा कि सरकार प्रशासन और राजनीति को अलग-अलग नजरिए से देखती है। उनके अनुसार, बैठक का उद्देश्य केवल प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा करना था और सभी विधायकों को बुलाया गया था।
मानसून और बाढ़ तैयारी पर हुआ फोकस
उत्तर बंगाल में प्री-मानसून का दौर शुरू हो चुका है और डुआर्स क्षेत्र में बारिश का असर भी दिखाई देने लगा है। इसी को देखते हुए संभावित बाढ़ और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा के लिए यह बैठक आयोजित की गई।
बैठक में सिंचाई विभाग, एनडीआरएफ, बीएसएफ और एसएसबी के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। फैसला लिया गया कि प्रत्येक जिले में कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे। साथ ही उत्तर बंगाल विकास विभाग में भी अलग कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा।
संवेदनशील इलाकों में विशेष तैयारी
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील इलाकों में पहले से बोल्डर जमा किए जा रहे हैं। राहत सामग्री, तिरपाल, दवाइयां और पीने के पानी का स्टॉक भी तैयार किया जा रहा है।
मिरिक में पिछले साल हुई प्राकृतिक आपदा को ध्यान में रखते हुए पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और जलस्तर बढ़ने की स्थिति से निपटने के लिए जीटीए के साथ अलग बैठक करने का फैसला लिया गया है।
केंद्र के साथ मिलकर काम करने की बात
बैठक में इंडो-भूटान नदी आयोग और मालदा में गंगा नदी से जुड़ी बाढ़ स्थितियों पर केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करने पर भी सहमति बनी। कई अन्य नदियों के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार करने की बात कही गई।
निशीथ प्रमाणिक ने कहा कि पहले राज्य और केंद्र सरकार के संबंध बेहतर नहीं थे, जिसके कारण कई योजनाएं प्रभावित होती थीं। अब “डबल इंजन सरकार” होने से काम तेजी से आगे बढ़ सकेगा।