कोलकाताः पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के विष्णुपुर विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के विधायक दिलीप मंडल को ओडिशा के पुरी से गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्हें बुधवार को पुरी स्थित ब्लू लिली होटल से पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने हिरासत में लिया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता लाया जा रहा है, जहां उनसे आगे की पूछताछ की जाएगी।
चुनाव के बाद वायरल वीडियो से शुरू हुआ विवाद
यह मामला 11 मई 2026 का है, जब विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद एक सभा में दिलीप मंडल पर कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यकर्ताओं और पुलिस को जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विष्णुपुर थाने में उनके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद से ही वे फरार चल रहे थे।
छापेमारी में सामने आई लग्जरी संपत्ति
14 मई को पुलिस ने उनके पैलान स्थित आवास पर छापा मारा। इस दौरान वहां स्विमिंग पूल और अंडरग्राउंड लग्जरी शेल्टर जैसी सुविधाएं मिलने की बात सामने आई, जिसके बाद उनकी संपत्ति और आय के स्रोतों पर भी सवाल खड़े हुए।
मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी थी।
बेटे की गिरफ्तारी से और बढ़ा मामला
इसी बीच 18 मई 2026 को उनके बेटे अर्घ्य मंडल को बकखाली-फ्रेजरगंज इलाके से अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार किया गया। उनके साथ चार अन्य लोगों को भी पकड़ा गया। इसके बावजूद दिलीप मंडल लगभग 9–10 दिनों तक फरार रहे और पुलिस की पकड़ से बाहर बने रहे।
हाईकोर्ट में याचिका, लेकिन राहत नहीं
फरारी के दौरान 22 मई को उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत और सुरक्षा की याचिका दायर की थी। अदालत ने याचिका दाखिल करने की अनुमति दी, लेकिन तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।
इस दौरान बताया गया कि वे ओडिशा के पुरी में छिपे हुए थे, जहां से अब उन्हें गिरफ्तार किया गया है।
STF की पूछताछ और आगे की जांच
अब पश्चिम बंगाल एसटीएफ उन्हें कोलकाता लाकर विस्तृत पूछताछ करेगी। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में आगे और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
यह कार्रवाई चुनाव के बाद राज्य में बढ़ते राजनीतिक तनाव और आपराधिक मामलों पर सख्ती के तौर पर देखी जा रही है।
इस गिरफ्तारी को कानून व्यवस्था के लिहाज से बड़ी सफलता माना जा रहा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि किसी भी स्थिति में कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह जनप्रतिनिधि ही क्यों न हो।