उत्तर 24 परगनाः पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना के चर्चित गैंगस्टर जयंत सिंह उर्फ जायंट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति आसानुद्दीन अमानुल्लाह ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि उनके विचार में ऐसा व्यक्ति पूरी जिंदगी जेल में रहना चाहिए।
कोर्ट ने खास तौर पर इस बात पर नाराजगी जताई कि एक ही घटना को लेकर दो अलग-अलग थानों में अलग FIR क्यों दर्ज की गईं। अदालत ने पूछा कि क्या पूर्व में राज्य पुलिस ने जानबूझकर ढिलाई बरती, जिससे आरोपी को कानूनी फायदा मिला।
मारपीट और धमकी के मामले से जुड़ा विवाद
यह मामला अरित्र घोष नामक व्यक्ति की शिकायत से जुड़ा है। वर्ष 2024 में उन्होंने जायंट सिंह पर मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था। शिकायत के बाद 5 जुलाई 2024 को पुलिस ने जायंट को गिरफ्तार किया था।
हालांकि बाद में उसे कलकत्ता हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। इसी बिंदु पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि पुलिस ने जमानत के खिलाफ तुरंत चुनौती क्यों नहीं दी।
दो FIR पर कोर्ट ने जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि एक ही घटना के लिए दो अलग-अलग FIR दर्ज करना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत के अनुसार इस प्रक्रिया का लाभ आरोपी को मिला।
फिलहाल जायंट सिंह दूसरे मामले में जेल में बंद है, लेकिन अदालत ने संकेत दिया कि कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में पुलिस को ज्यादा जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा।
हाईकोर्ट को जल्द सुनवाई का निर्देश
न्यायमूर्ति आसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. माधवन की पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि जायंट सिंह की जमानत से जुड़ी दूसरी याचिका पर जल्द सुनवाई की जाए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य पुलिस की पिछली भूमिका पर तीखी नाराजगी व्यक्त की। मामले में पूर्व डीजीपी पीयूष पांडे को हलफनामा दाखिल कर अदालत से माफी भी मांगनी पड़ी थी।
सुप्रीम कोर्ट के दबाव के बाद हरकत में आई पुलिस
अदालत की सख्ती के बाद राज्य सरकार को जमानत के खिलाफ नया मामला दायर करना पड़ा। नई सरकार के आने के बाद पुलिस ने संगठित अपराध और कुख्यात अपराधियों के मामलों में सख्त रणनीति अपनाने का दावा किया है।
इसी के तहत अब एक नया SOP यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार किया गया है, ताकि गंभीर अपराधों में आरोपी आसानी से जमानत न पा सकें।
बंगाल में संगठित अपराध पर बढ़ी चिंता
पश्चिम बंगाल में संगठित अपराध लंबे समय से कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बना हुआ है। NCRB के आंकड़ों के मुताबिक 2023-24 के दौरान राज्य में गैंगस्टर और संगठित अपराध से जुड़े कई मामले दर्ज किए गए।
2025-26 में प्रशासन के सख्त रुख के बाद कई कुख्यात अपराधियों के खिलाफ अभियान तेज हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह सख्ती पुलिस प्रशासन को ज्यादा जवाबदेह बनाएगी और आम लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत करेगी।
कानून व्यवस्था को लेकर बड़ा संदेश
कानूनी जानकारों का कहना है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप सिर्फ एक आरोपी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी की तरह देखा जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जांच और अभियोजन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब सभी की नजर मामले की अगली सुनवाई पर टिकी है। माना जा रहा है कि इस केस का असर भविष्य में संगठित अपराध से जुड़े मामलों की जांच प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।