नई दिल्ली: संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा है कि नेट न्यूट्रैलिटी और इंटरनेट उपयोग में समान अधिकारों से जुड़े मुद्दों की जांच के तहत समिति जल्द ही प्रमुख डिजिटल और सोशल मीडिया कंपनियों को तलब करेगी। इनमें मेटा प्लेटफॉर्म्स, एक्स, गूगल और अमेजन जैसी कंपनियां शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि समिति यह सुनिश्चित करना चाहती है कि देश के 140 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के तहत समान अधिकार मिले और इंटरनेट सेवाओं में किसी प्रकार का भेदभाव न हो।
पोस्टपेड और प्रीपेड उपभोक्ताओं के बीच अंतर की जांच
26 मई को आयोजित संसदीय समिति की बैठक के बाद एएनआई से बातचीत में निशिकांत दुबे ने कहा कि समिति इस बात की समीक्षा कर रही है कि कहीं दूरसंचार कंपनियां और डिजिटल प्लेटफॉर्म कुछ विशेष वर्गों को प्राथमिकता वाली इंटरनेट सेवाएं तो उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। यह देखा जा रहा है कि क्या पोस्टपेड उपभोक्ताओं या अतिरिक्त भुगतान करने वाले ऑनलाइन ग्राहकों को अन्य लोगों की तुलना में अधिक सुविधाएं दी जा रही हैं। दुबे के अनुसार संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को भी समान उपभोक्ता अधिकार मिलने चाहिए।
उन्होंने कहा, “हम 140 करोड़ लोगों के हितों की बात कर रहे हैं। सभी को बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। नेट न्यूट्रैलिटी महत्वपूर्ण है और इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले सभी उपभोक्ताओं को उपभोक्ता संरक्षण अधिकारों के तहत समान सुविधाएं मिलनी चाहिए।”
दूरसंचार विभाग और ट्राई ने समिति को दी जानकारी
संसदीय समिति की बैठक के एजेंडे में दूरसंचार विभाग और भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण यानी ट्राई द्वारा दूरसंचार क्षेत्र में सेवा गुणवत्ता मानकों और उपभोक्ता संरक्षण पर प्रस्तुति शामिल थी। इस दौरान नेट न्यूट्रैलिटी के मुद्दे पर विशेष रूप से चर्चा की गई। निशिकांत दुबे ने कहा कि समिति अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है और आने वाले हफ्तों में इस विषय पर आगे भी विचार-विमर्श जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि नेटवर्क लाइसेंस की शर्तें सरकार तय करती है। देश में लगभग 90 प्रतिशत उपभोक्ता प्रीपेड सेवाओं का उपयोग करते हैं, जबकि करीब 10 प्रतिशत पोस्टपेड ग्राहक हैं। समिति के संज्ञान में यह बात आई है कि कुछ कंपनियां पोस्टपेड ग्राहकों को अधिक सुविधाएं देना चाहती हैं और प्रीपेड उपयोगकर्ताओं को अपेक्षाकृत कम सुविधाएं मिल रही हैं, हालांकि इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
‘नेटवर्क स्लाइसिंग’ फीचर को लेकर भी उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार समिति के कुछ सदस्यों ने हाल ही में एक निजी दूरसंचार कंपनी द्वारा पोस्टपेड ग्राहकों के लिए शुरू किए गए “नेटवर्क स्लाइसिंग” फीचर पर चिंता जताई। सदस्यों ने सवाल उठाया कि क्या अलग-अलग श्रेणी के उपभोक्ताओं को अलग नेटवर्क एक्सेस देना इंटरनेट के गैर-भेदभावपूर्ण उपयोग के सिद्धांत के खिलाफ है। बताया गया है कि ट्राई इस विषय पर अतिरिक्त जानकारी और स्पष्टीकरण के साथ समिति के सामने दोबारा अपना पक्ष रखेगा।
सोशल मीडिया और टेक कंपनियों की सेवाओं की भी होगी समीक्षा
निशिकांत दुबे ने संकेत दिया कि समिति की जांच केवल दूरसंचार कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन बड़ी टेक और सोशल मीडिया कंपनियों की भी समीक्षा की जाएगी जो भुगतान आधारित या प्रीमियम सदस्यता के आधार पर अलग-अलग सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं। उन्होंने कहा कि गूगल, अमेजन, फेसबुक और एक्स जैसी कंपनियों से यह समझने की कोशिश की जाएगी कि वे किस प्रकार भुगतान करने वाले उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति एक्स प्लेटफॉर्म को भुगतान करता है तो उसे लिखने या उपयोग से जुड़ी अधिक स्वतंत्रता मिलती है, जबकि सामान्य उपयोगकर्ताओं को कम सुविधाएं मिलती हैं।
उपभोक्ता अधिकार और संवैधानिक समानता का मुद्दा
समिति अध्यक्ष ने कहा कि यह विषय सीधे तौर पर उपभोक्ता अधिकारों और संवैधानिक समानता से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, समिति इंटरनेट उपयोग में निष्पक्षता और तटस्थता बनाए रखने को लेकर गंभीर है। बताया गया है कि नेट न्यूट्रैलिटी, दूरसंचार सेवाओं की गुणवत्ता और उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर अंतिम टिप्पणियां तैयार करने से पहले संसदीय समिति दो से तीन और बैठकें आयोजित कर सकती है।