नई दिल्ली : वैश्विक तनाव और पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच भारतीय शेयर बाजार में लगातार दबाव देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों द्वारा जारी एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के कारण बाजार पर नकारात्मक असर बढ़ता जा रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार पश्चिम एशिया में युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने जैसी परिस्थितियों के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसके साथ ही दलाल स्ट्रीट में कुछ हिस्सों में ओवर वैल्यूएशन का दबाव भी देखा जा रहा है, जिससे विदेशी निवेशकों का रुझान भारत से बाहर की ओर बढ़ा है। इस कारण “विदेशी निवेशकों का भारत छोड़ो” ट्रेंड जारी है और शेयर बाजार में लगातार सेलिंग प्रेशर बढ़ रहा है।
आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष अब तक (22 मई तक) विदेशी निवेशकों ने कुल लगभग 2.22 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं। मार्च और अप्रैल में यह बिकवाली क्रमशः 1,17,775 करोड़ रुपये और 60,847 करोड़ रुपये रही। मई में भी यह रुझान जारी रहा और शुक्रवार तक विदेशी निवेशकों ने 30,374 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस लगातार बिकवाली ने बाजार में विदेशी निवेशकों के दृष्टिकोण को लेकर नकारात्मक संकेत दिए हैं।
विदेशी निवेशक शेयर बेचकर क्यों जा रहे हैं?
विशेषज्ञों के एक वर्ग का मानना है कि पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाला व्यापार प्रभावित हुआ है, जिससे कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ा है। इसके चलते वैश्विक बाजार में ऊर्जा की कीमतों में तेजी आई है। भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देश की लागत बढ़ने से विदेशी निवेशकों की रुचि घट गई है और वे प्रॉफिट बुकिंग बढ़ा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार युद्ध के बाद डॉलर सूचकांक और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है। इस कारण निवेशकों का एक बड़ा हिस्सा अब डॉलर, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स और डब्ल्यूटीआई क्रूड जैसे निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहा है। इससे भारतीय शेयर बाजार से पूंजी निकलकर अन्य साधनों में जा रही है, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ रहा है।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि आने वाले समय में पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त होने के संकेत मिल सकते है जिससे बाजार में सकारात्मक रुझान लौट सकता है।
गौरतलब है कि वर्ष 2025 में भी विदेशी निवेशकों ने भारी मात्रा में प्रॉफिट बुकिंग की थी जिसमें लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली दर्ज की गई थी। इसका प्रमुख कारण बाजार में कुछ क्षेत्रों में ओवर वैल्यूएशन को माना गया था।