नयी दिल्लीः एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास आपूर्ति बाधित होने के कारण पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इसका असर कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भारी बढ़ोतरी के रूप में सामने आया। लेकिन भारत में हालात तुलनात्मक रूप से काफी नियंत्रित रहे और यहां ईंधन की कीमतों में सीमित वृद्धि दर्ज की गई।
सरकारी जानकारी के अनुसार भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल मिलाकर लगभग 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि हाल ही में तेल विपणन कंपनियों-इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा 15, 19 और 23 मई को किए गए चरणबद्ध संशोधनों के बाद आई।
इन बदलावों के तहत पेट्रोल के दाम लगभग 4.74 रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम लगभग 4.82 रुपये प्रति लीटर बढ़े। इससे पहले करीब 76 दिनों तक देश में ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई थीं, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगातार अस्थिर बने रहे।
दुनिया के कई देशों में भारी बढ़ोतरी
भारत की तुलना में कई देशों में ईंधन की कीमतों में काफी तेज उछाल देखा गया। म्यांमार में पेट्रोल लगभग 90 प्रतिशत और डीजल 112 प्रतिशत से अधिक महंगा हो गया। मलेशिया में पेट्रोल 56 प्रतिशत से ज्यादा और डीजल 71 प्रतिशत से अधिक बढ़ा, जबकि पाकिस्तान में पेट्रोल करीब 55 प्रतिशत और डीजल 45 प्रतिशत तक बढ़ा।
विकसित देशों में भी असर दिखा। अमेरिका में पेट्रोल 44.5 प्रतिशत और डीजल 48.1 प्रतिशत तक बढ़ गया। ब्रिटेन में पेट्रोल 19 प्रतिशत से अधिक और डीजल 34 प्रतिशत से ज्यादा महंगा हुआ। फ्रांस में पेट्रोल 21 प्रतिशत और डीजल 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
एशिया के अन्य देशों में भी कीमतें बढ़ीं। नेपाल में पेट्रोल 38 प्रतिशत और डीजल 59 प्रतिशत तक बढ़ा, जबकि श्रीलंका में दोनों ईंधनों की कीमतों में 38 से 41 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई। चीन में पेट्रोल 21 प्रतिशत और डीजल 24 प्रतिशत बढ़ा, वहीं दक्षिण कोरिया में पेट्रोल 19 प्रतिशत और डीजल 26 प्रतिशत तक महंगा हुआ।
भारत में राहत क्यों मिली?
सरकारी पक्ष का कहना है कि भारत में ईंधन की कीमतों पर बढ़ोतरी का असर सीमित रखने में टैक्स नीति और समय-समय पर किए गए हस्तक्षेप की बड़ी भूमिका रही। सरकार ने पिछले वर्षों में कई बार एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का सीधा असर आम उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा।
मार्च 2026 में पेट्रोल और डीजल पर 10-10 रुपये प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी में कटौती भी की गई थी। इसी वजह से पश्चिम एशिया संकट के दौरान भी कीमतों में अचानक बड़ा उछाल नहीं देखा गया।
पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री मार्गों पर आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के चलते अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। इसी वजह से दुनिया के कई देशों में ईंधन महंगा हुआ, लेकिन भारत में इसका असर अपेक्षाकृत कम रहा।