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महंगाई की चौतरफा मार, पेट्रोल-डीजल के बाद CNG के भी दाम बढ़े

शनिवार को पेट्रोल औी डीजल की कीमतें बढ़ने के बाद सीएनजी के भी दाम बढ़ गए। इसका असर आने वाले दिनों में जनता की जेब पर दिखाई दे सकता है।

By लखन भारती

May 23, 2026 16:25 IST

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में मचे संकट के बीच देश में ईंधन की कीमतों में आग लगी हुई है। शनिवार को पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी के बाद आम जनता को सीएनजी (CNG) का भी बड़ा झटका लगा। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने सीएनजी की कीमतें बढ़ा दी हैं।

शनिवार को सीएनजी की कीमतों में 1 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई है। पिछले 10 दिनों के भीतर सीएनजी के दामों में की गई यह तीसरी बढ़ोतरी है। इसके साथ ही दिल्ली में सीएनजी की कीमतें पहली बार 80 रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गई हैं। इससे पहले बीते 15 मई को सीएनजी 2 रुपये प्रति किलो और 17 मई को 1 रुपये प्रति किलो महंगी हुई थी।

दिल्ली-एनसीआर में CNG के नए दाम

सीएनजी में 1 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी के बाद दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों (NCR) में नई कीमतें इस प्रकार हैं:

दिल्ली: 81.09 रुपये प्रति किलोग्राम

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद: 89.70 रुपये प्रति किलोग्राम

गुरुग्राम: 86.12 रुपये प्रति किलोग्राम

जनता पर पड़ेगी मार

पेट्रोल-डीजल और सीएनजी महंगी होने का सबसे सीधा असर दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों के पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर पड़ेगा, जहां भारी संख्या में बसें, ऑटो और टैक्सियां इसी ईंधन पर चलती हैं। इसके चलते आने वाले दिनों में ऑटो और कैब का किराया बढ़ने की पूरी संभावना है।

114 डॉलर पर पहुंचा भारत का क्रूड बास्केट

वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराने की वजह से घरेलू बाजार में यह हाहाकार मचा हुआ है। मिडिल ईस्ट में तनाव से पहले जो कच्चा तेल (Crude Oil) 70 से 72 डॉलर प्रति बैरल पर मिल रहा था, वह युद्ध के दौरान 120 डॉलर के पार चला गया और फिलहाल 104 से 110 डॉलर के बीच बना हुआ है।

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि उसका अपना कच्चा तेल बास्केट जो फरवरी में महज 69 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, वह हाल के महीनों में औसतन 113 से 114 डॉलर प्रति बैरल तक महंगा हो चुका है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा और तत्काल असर घरेलू जेब पर पड़ता है।

टैक्सी यूनियनों और कमर्शियल ड्राइवरों का प्रदर्शन तेज

ईंधन के बढ़ते दामों और स्थिर किरायों के खिलाफ दिल्ली-एनसीआर में कमर्शियल वाहन चालकों और टैक्सी यूनियनों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस और चालक शक्ति यूनियन समेत कई बड़े परिवहन संगठनों ने सरकार से बढ़े हुए दाम तुरंत वापस लेने और टैक्सी के बेस किराये में संशोधन करने की मांग की है। यूनियनों का कहना है कि परिचालन लागत बढ़ने से ड्राइवरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

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