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भारतीय फुटबॉल में बढ़ा संकट, ISL क्लबों ने AIFF से मांगी संरचनात्मक और आर्थिक स्पष्टता

भारतीय फुटबॉल में बढ़ा संकट, ISL क्लबों ने AIFF से मांगी संरचनात्मक और आर्थिक स्पष्टता।

By शिखा सिंह

May 23, 2026 15:27 IST

नई दिल्ली : इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के पांच प्रमुख क्लबों-केरल ब्लास्टर्स एफसी, चेन्नइयन एफसी, मोहन बागान सुपर जायंट, स्पोर्टिंग क्लब दिल्ली और मुंबई सिटी एफसी-ने सोशल मीडिया पर संयुक्त बयान जारी कर भारतीय फुटबॉल के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता जताई है। क्लबों ने ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (एआईएफएफ) से लीग की संरचना और आर्थिक स्थिति पर स्पष्टता मांगी है और चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वे भविष्य में लीग में अपनी भागीदारी पर दोबारा विचार कर सकते हैं।

शुक्रवार को इंस्टाग्राम पर जारी संयुक्त बयान में इन क्लबों ने कहा कि भारतीय पेशेवर फुटबॉल लगातार अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है और मौजूदा हालात को देखते हुए वे अब मौजूदा सीजन के बाद आईएसएल में अपनी प्रतिबद्धता की सीमा की समीक्षा करने के लिए मजबूर हो गए हैं।

क्लबों ने बयान में कहा, “गहरी चिंता और निराशा के साथ हम यह कहना चाहते हैं कि भारतीय पेशेवर फुटबॉल के भविष्य को लेकर जारी अनिश्चितता के कारण अब हमें मौजूदा सत्र के बाद लीग में अपनी भागीदारी और प्रतिबद्धता पर पुनर्विचार करना पड़ रहा है।”

आईएसएल का आयोजन आमतौर पर हर साल सितंबर से अप्रैल के बीच होता है लेकिन इस बार लीग की शुरुआत 14 फरवरी से हुई और 21 मई को इसका समापन हुआ। इस देरी की सबसे बड़ी वजह प्रसारण अधिकारों को लेकर लंबे समय तक बनी अनिश्चितता रही। कई महीनों तक कोई बोलीदाता सामने नहीं आने के बाद आखिरकार लीग के डिजिटल और टेलीविजन प्रसारण अधिकार फैनकोड को मिले।

लीग के संचालन में ठहराव की स्थिति ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन और उसके साझेदार फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (एफएसडीएल) के बीच मतभेदों के कारण पैदा हुई। दोनों पक्षों के बीच कुछ अनुबंध संबंधी मुद्दे लंबे समय से लंबित थे, जिसके चलते पूरे ढांचे पर सवाल खड़े हो गए।

संयुक्त बयान में क्लबों ने कहा कि उन्होंने तमाम कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारतीय फुटबॉल में लगातार निवेश किया है और खेल के विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता बनी हुई है। हालांकि लीग की संरचना, आर्थिक मॉडल और दीर्घकालिक दिशा को लेकर लगातार बनी अनिश्चितता ने क्लबों के लिए अपने निवेश और संचालन को टिकाऊ बनाए रखना बेहद कठिन कर दिया है।

क्लबों ने कहा, “हमारे क्लबों ने लगातार मुश्किल और अनिश्चित परिस्थितियों में भी भारतीय फुटबॉल में निवेश किया है और इसके भविष्य के लिए समर्पित रहे हैं। लेकिन संरचनात्मक स्पष्टता, व्यावसायिक पारदर्शिता और दीर्घकालिक दृष्टि की कमी के कारण अब वित्तीय और संचालन संबंधी प्रतिबद्धताओं को स्थायी रूप से जारी रखना मुश्किल होता जा रहा है।”

क्लबों ने यह भी माना कि भारतीय फुटबॉल में अपार संभावनाएं मौजूद हैं लेकिन उन्होंने इस बात पर निराशा जताई कि लीग को खड़ा करने, उसे आर्थिक सहयोग देने और लोकप्रिय बनाने वाले पक्षों को ही लगातार अस्थिरता का सामना करना पड़ रहा है।

बयान में कहा गया कि भारतीय फुटबॉल में आज की स्थिति से कहीं अधिक आगे बढ़ने की क्षमता है। यह बेहद निराशाजनक है कि जिन लोगों ने लीग को बनाया, वित्तीय सहयोग दिया, प्रचारित किया और उसे आगे बढ़ाया, वही आज उस ढांचे को लेकर असमंजस में हैं जिसके भीतर उन्हें काम करना है।

इन क्लबों ने भारतीय फुटबॉल के लिए आर्थिक रूप से टिकाऊ मॉडल तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही एआईएफएफ से आग्रह किया कि वह क्लबों की ओर से दिए गए वैकल्पिक मॉडल पर गंभीरता से विचार करे और सभी पक्षों के साथ मिलकर ऐसा ढांचा तैयार करे जो स्थायी, समावेशी और व्यावहारिक हो।

संयुक्त बयान के अंत में क्लबों ने कहा, “भारतीय फुटबॉल के भविष्य के केंद्र में आर्थिक रूप से टिकाऊ लीग होना बेहद जरूरी है। क्लबों ने एक वैकल्पिक मॉडल का प्रस्ताव दिया है, जिसे हम विश्वसनीय, रचनात्मक और गंभीरता से विचार किए जाने योग्य मानते हैं। हम एआईएफएफ से आग्रह करते हैं कि वह लीग को चलाने और उसमें निवेश करने वालों की वास्तविक चुनौतियों को समझे और सभी हितधारकों को साथ लेकर एक स्थायी और समावेशी ढांचा तैयार करे।”

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