तृणमूल कांग्रेस लगातार केंद्र की नरेंद्र मोदी की सरकार पर बंगाल को 'वंचित' करने का आरोप लगाती रही है। उसका जवाब देते हुए भाजपा नेता व बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल पर तीखा वार किया है।
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद पहली बार दिल्ली गए शुभेंदु अधिकारी ने बंगभवन में संवाददता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि सिर्फ भाषण देने से काम नहीं चलेगा बल्कि जनता के लिए काम भी करना होगा। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि परियोजनाओं का नाम बदल देने से केंद्र का आवंटन कैसे मिलेगा?
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री अन्न सुरक्षा को ‘खाद्यसाथी’ नाम देकर आप केंद्र से आवंटन कैसे मांग सकते हैं? आप नीला-सफेद रंग नहीं बदलेंगे! प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को ‘बंगालर ग्राम सड़क’ लिखने से आवंटन क्यों मिलेगा? विश्वकर्मा योजना और उज्ज्वला योजना को आपने क्यों रोका था? इसी वजह से बंगाल की जनता ने सरकार बदली है।
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हालांकि उन्होंने इस दौरान किसी का भी नाम नहीं लिया लेकिन जानकारों का मानना है कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर ही निशाना साधा था। शुभेंदु अधिकारी ने आगे कहा कि पूरे देश में भारतीय न्याय संहिता लागू हो चुकी है लेकिन इसे बंगाल में लागू नहीं किया गया है। राज्य में न तो जनगणना का काम शुरू हुआ है, न ही BSF को भूमि हस्तांतरित किया जा रहा था। हमने सबसे पहले ये काम किए हैं।
गौरतलब है कि दिल्ली दौरे पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ-साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल के प्रभारी वरिष्ठ नेता नीतिन नबीन से भी मुलाकात की। उन्होंने बताया कि जल्द ही राज्य के मंत्रिमंडल का विस्तार होगा जिसकी सूची लोकभवन को भेज दी जाएगी।
इसके बाद लोकभवन में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा जिसका सीधा प्रसारण किया जाएगा ताकि आम जनता भी इसे देख सकें। उन्होंने कहा कि यहीं सामान्य प्रक्रिया है। साथ ही उन्होंने इशारों में दिल्ली में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से राज्य मंत्रिमंडल के विस्तार के बारे में भी बात करने की बात कही। हालांकि इस बारे में उन्होंने कुछ भी विस्तार से नहीं बताया।
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घुसपैठ के मुद्दे पर अपने कड़े रुख के बारे में उन्होंने कहा कि बंगाल सरकार का इस बारे में रुख 'डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट' की है। इन तीन शब्दों के बाहर कोई भी नीति नहीं होनी चाहिए। शुभेंदु अधिकारी ने आगे कहा कि जेल में रखने पर सरकार को भोजन, कपड़े, दवाइयां, साबुन, तेल और अन्य सुविधाओं पर खर्च करना पड़ता है। इससे राजकोष पर बोझ बढ़ता है।
उन्होंने आगे कहा कि पूरे देश में पहले ही डिपोर्टेशन नियम लागू हो चुके हैं और पश्चिम बंगाल में भी इसे लागू किया जाएगा। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि अवैध घुसपैठियों को किसी तरह की विशेष सुविधा नहीं दी जाएगी। हालांकि पश्चिम बंगाल में डिटेंशन सेंटर बनाए जाने को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को उन्होंने पूरी तरह निराधार बताया।