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युवा आबादी और विनिर्माण क्षमता से भारत बना वैश्विक निवेश का नया केंद्र

चीन के विकल्प के रूप में उभर रहा भारत, विदेशी निवेशकों का बढ़ा भरोसा।

By रजनीश प्रसाद

May 22, 2026 19:54 IST

नई दिल्ली : वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव के बीच भारत खुद को चीन के विकल्प के रूप में एक भरोसेमंद निवेश केंद्र बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के कुलपति राकेश मोहन जोशी ने कहा कि भारत अपनी युवा आबादी, अंग्रेजी जानने वाले कार्यबल और बढ़ते विनिर्माण क्षेत्र के दम पर विदेशी प्रत्यक्ष निवेश आकर्षित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि दुनिया अब भारत को सुरक्षित और विश्वसनीय निवेश गंतव्य के रूप में देख रही है। भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विशाल जनसंख्या और लगभग 90 करोड़ युवा हैं। कई देश अब विनिर्माण और निवेश के लिए चीन के विकल्प तलाश रहे हैं और भारत इस अवसर का लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है।

जोशी के अनुसार भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा, हस्तशिल्प, समुद्री उत्पाद और मोबाइल फोन निर्माण जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रहा है। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन निर्माण के क्षेत्र में भारत ने क्रांतिकारी प्रगति की है और अब वह दुनिया के प्रमुख स्मार्टफोन निर्माता तथा निर्यातक देशों में शामिल हो चुका है।

विदेशी संस्थागत निवेश के बारे में उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के कारण हाल के समय में कुछ निवेश बाहर गए हैं लेकिन भारत निवेश बनाए रखने और नए निवेश आकर्षित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उनके अनुसार विदेशी निवेश रुपये की विनिमय दर को स्थिर रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

राकेश मोहन जोशी ने कहा कि भारत इस समय गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है क्योंकि देश की लगभग 89 प्रतिशत पेट्रोलियम जरूरतें आयात से पूरी होती हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने बताया कि पहले कच्चे तेल की कीमत 64 से 66 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी जो अब 110 अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुकी है और आगे 140 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है।

उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति ने पेट्रोलियम और गैस आपूर्ति को प्रभावित किया है जिससे ऊर्जा और उर्वरक की कीमतें बढ़ रही हैं। इसका असर उत्पादन लागत, महंगाई और आम लोगों के जीवन पर पड़ सकता है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर उन्होंने कहा कि यह तकनीक उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मददगार हो सकती है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक अच्छा साधन है लेकिन उस पर पूरी तरह निर्भरता ठीक नहीं होगी।

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